अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 365, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसब के पोषक सूर्य देव सभी दिशाओं को जानते हैं. वे हमें भयरहित मार्गों से ले चलें. कल्याण के दाता, दीप्तिपूर्ण एवं पुत्र, पौत्र आदि वीरों से युक्त तथा प्रमाद न करते हुए और हमें पूर्ण रूप से जानते हुए आगेआगे चलें. (२) पूषन् तव व्रते वयं न रिष्येम कदा चन. स्तोतारस्त इह स्मसि.. (३) हे पूषा! अर्थात् सूर्य देव! तुम्हारे यज्ञरूप कर्म में संलग्न हम कभी भी नष्ट न हों. इस कर्म में हम सदा तुम्हारे स्तुतिकर्ता बनें. (३) परि पूषा परस्ताद्धस्तं दधातु दक्षिणम्. पुनर्नो नष्टमाजतु सं नष्टेन गमेमहि.. (४) पोषक सूर्य देव अधिक दूर देश से भी धन देने के लिए अपना दाहिना हाथ फैलाएं. हमारा नष्ट हुआ धन पुनः हमारे पास आए. हम अपने नष्ट हुए धन से पुनः मिल जाएं. (४) सूक्त-११ देवता—सरस्वती यस्ते स्तनः शशयर्यो मयोभूर्यः सुम्नयुः सुहवो यः सुदत्रः. येन विश्वा पुष्यसि वार्याणि सरस्वति तमिह धातवे कः.. (१) हे वाणी की देवी सरस्वती! तेरा जो स्तन शिशु का पोषण करता है, सुख प्रदाता है, दूसरों को सुख देता है, जो सब के द्वारा आह्वान किया जाता है, जो कल्याण के साधन देता है और जिस के द्वारा समस्त धनों का पोषण होता है, अपने इस प्रकार के स्तन को इस जन्मगृहीत करने वाले बालक के पीने योग्य बनाओ. (१) सूक्त-१२ देवता—सरस्वती यस्ते पृथु स्तनयित्नुर्य ऋष्वो दैवः केतुर्विश्वमाभूषतीदम्. मा नो वधीर्विद्युता देव सस्यं मोत वधी रश्मिभिः सूर्यस्य.. (१) हे देवपर्जन्य! तुम्हारा जो विस्तृत और महान गर्जन करता हुआ वज्र है, जो बाधक, देव निर्मित एवं अनर्थ ज्ञापक वज्र है, वह इस सारे विश्व को व्याप्त करता है. हे पर्जन्य देव! इस प्रकार के वज्र से हमारी फसलों का विनाश मत करो, इस के अतिरिक्त सूर्य की किरणों से हमारी फसलों का विनाश मत होने दो. (१) सूक्त-१३ देवता—सभा, समिति आदि सभा च मा समितिश्चावतां प्रजापतेर्दुहितरौ संविदाने. येना संगच्छा उप मा स शिक्षाच्चारु वदानि पितरः संगतेषु.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*