अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 368, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंकण्व नामक ऋषि ने प्राप्त किया था. वह कृपा दृष्टि अत्यधिक बढ़ी हुई, अनेक धाराओं वाली तथा सौभाग्यदायिनी थी. (१) सूक्त-१७ देवता—सविता बृहस्पते सवितर्वर्धयैनं ज्योतयैनं महते सौभागाय. संशितं चित् सन्तरं सं शिशाधि विश्व एनमनु मदन्तु देवाः.. (१) हे बृहस्पति एवं हे सविता देव! सूर्योदय तक सोने वाले इस ब्रह्मचारी और यजमान को बढ़ाओ. इस यजमान और ब्रह्मचारी को महान सौभाग्य के लिए प्रकाशित करो. व्रत धारण करने वाले इस को भलीभांति कुशल बनाओ. सभी देव इस यजमान का अनुमोदन करें. (१) सूक्त-१८ देवता—धाता आदि धाता दधातु नो रयिमीशानो जगत्स्पतिः. स नः पूर्णेन यच्छतु.. (१) सभी साधनों से युक्त एवं जगत् के पालक धाता देव हमारे लिए धन प्रदान करें. वे धाता देव हमें पूर्ण और समृद्ध करें. (१) धाता दधातु दाशुषे प्राचीं जीवातुमक्षितात्. वयं देवस्य धीमहि सुमतिं विश्वराधसः.. (२) धाता देव हवि देने वाले मुझ यजमान को हमारे अभिमुख आने वाली, जीवनदायिनी एवं क्षीण न होने वाली सुमति प्रदान करें. हम भी क्षीण न होने वाले धन को धारण करने वाले धाता देव की अनुग्रह बुद्धि धारण करें. (२) धाता विश्वा वार्या दधातु प्रजाकामाय दाशुषे दुरोणे. तस्मै देवा अमृतं सं व्ययन्तु विश्वे देवा अदितिः सजोषाः.. (३) धाता देव वरण करने योग्य समस्त फलों को धारण करें. वे फल प्राप्ति की इच्छा करने वाले यजमान के हेतु हों. उस यजमान के लिए इंद्र आदि अमृत प्रदान करें. वे सभी देव एवं देवमाता अदिति परस्पर मिल कर प्रयत्नशील हों. (३) धाता रातिः सवितेदं जुषन्तां प्रजापतिर्निधिपतिर्नो अग्निः. त्वष्टा विष्णु प्रजया संरराणो यजमानाय द्रविणं दधातु.. (४) सभी कल्याणों के देने वाले धाता, कर्मों के प्रेरक सविता और वेदों के रक्षक प्रजापति, अग्नि, रूपों के निर्माता त्वष्टा, व्यापक देव विष्णु—ये सभी हमारे हवि को स्वीकार करें एवं यज्ञ करने वाले यजमान के लिए धन दें. (४) ebook converter DEMO Watermarks*