अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 370, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअनु मन्यतामनुमन्यमानः प्रजावन्तं रयिमक्षीयमाणम्. तस्य वयं हेडसि मा ऽ पि भूम सुमृडीके अस्य सुमतौ स्याम.. (३) हे अनुमति नामक देवी! मुझे पुत्र, पौत्र आदि से युक्त एवं कभी समाप्त न होने वाले धन को प्राप्त कराओ. हम तेरे क्रोध के विषय न बनें. हम इस अनुमति देवी की सुख देने वाली और अनुग्रह करने वाली बुद्धि में रहें. (३) यत् ते नाम सुहवं सुप्रणीते ऽ नुमते अनुमतं सुदानु. तेना नो यज्ञं पिपृहि विश्ववारे रयिं नो धेहि सुभगे सुवीरम्.. (४) हे यजमानों को धन देने वाली सुप्रणीति देवी एवं हे अनुमति! हमारे यज्ञ को इस प्रकार पूर्ण करो कि तुम्हारा हवन सिद्ध हो सके. यह प्रसन्न करने योग्य एवं अभिमत फल देने वाला है. (४) एमं यज्ञमनुमतिर्जगाम सुक्षेत्रतायै सुवीरतायै सुजातम्. भद्रा ह्यस्याः प्रमतिर्बभूव सेमं यज्ञमवतु देवगोपा.. (५) अनुमति देवी हमारे द्वारा दिए जाते हुए यज्ञ में आएं. वे हमें उत्तम फल देने वाली हों. हे विश्वधारा तथा हे सुभगा अनुमति! हमें उत्तम संतान वाला धन प्रदान करो. (५) अनुमतिः सर्वमिदं बभूव यत् तिष्ठति चरति यदु च विश्वमेजति. तस्यास्ते देवि सुमतौ स्यामानुमते अनु हि मंससे नः.. (६) अनुमति देवी ही यह सारा दिखाई देता हुआ संसार है. वह जगत् में स्थावर, जंगम आदि के रूप में वर्तमान है एवं बिना विचारे ज्येष्ठता करती हैं. यह सारा संसार बुद्धिपूर्वक चेष्टा करता है. हे अनुमति देवी! हम तेरी अनुग्रह बुद्धि में हों. हे अनुमति! तुम हमें अनुमति दो. (६) सूक्त-२२ देवता—आत्मा समेत विश्वे वचसा पतिं दिव एको विभूरतिथिर्जनानाम्. स पूर्व्यो नूतनमाविवासत् तं वर्तनिरनु वावृत एकमित् पुरु.. (१) हे सब बांधवो! आकाश के स्वामी सूर्य की स्तुति मंत्रों के द्वारा करो. वे सूर्य प्राणियों के मुख्य स्वामी एवं नित्य चलते रहने वाले हैं. वे पुरातन सूर्य इस नूतन पुरुष की सेवा करें. बहुत से सत्कर्म उस एकमात्र सूर्य के मार्ग का अनुवर्तन करते हैं. (१) सूक्त-२३ देवता—ब्रध्न अयं सहस्रमा नो दृशे कवीनां मतिर्ज्योतिर्विधर्मणि.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*