अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 378, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंकी तृप्ति के लिए हम उन का आह्वान करते हैं. (१) आ प्रत्यञ्चं दाशुषे दाश्वंसं सरस्वन्तं पुष्टपतिं रयिष्ठाम्. रायस्पोषं श्रवस्युं वसाना इह हुवेम सदनं रयीणाम्.. (२) सामने हो कर प्रसन्न करने के लिए हम हवि देने वाले यजमान को मनचाहा फल देने वाले, पोषण के स्वामी, धन के स्थान पर ठहरने वाले एवं धन के पोषक सरस्वान देव को सेवा के निमित्त बुलाते हैं. (२) सूक्त-४२ देवता—श्येन अति धन्वान्यत्यपस्ततर्द श्येनो नृचक्षा अवसानदर्श:. तरन् विश्वान्यवरा रजांसीन्द्रेण सख्या शिव आ जगम्यात्.. (१) मनुष्यों के सभी कर्मों के साक्षी एवं अंत में आकाश में दिखाई देने वाले सूर्य मरुस्थल को पार कर के अत्यधिक जलपूर्ण करें. वे आकाश से नीचे स्थित समस्त लोकों को पार करते हुए अपने मित्र इंद्र के साथ कल्याणकारी बन कर नवीन गृह निर्माण के स्थान में आएं. (१) श्येनो नृचक्षा दिव्यः सुपर्णः सहस्रपाच्छतयोनिर्वायोधाः. स नो नि यच्छाद् वसु यत् पराभूतमस्माकमस्तु पितृषु स्वधावत्.. (२) मनुष्यों के सभी कर्मों को देखने वाले, दिव्य एवं शोभन गति वाले, हजार किरणों वाले, असंख्य कार्यों के कारण एवं अन्न के दाता सूर्य हमें चिरकाल तक स्थापित करें. हमारा जो धन चोरों ने चुरा लिया है, वह हमारे पितरों के निमित्त स्वधा के रूप में हो. (२) सूक्त-४३ देवता—सोम सोमारुद्रा वि वृहतं विषूचीममीवा या नो गयमाविवेश. बाधेथां दूरं निर्ऋतिं पराचैः कृतं चिदेनः प्र मुमुक्तमस्मत्.. (१) हे सोम एवं रुद्र देव! सभी ओर फैलने वाले उस अमीवा नामक रोग का विनाश करो जो हमारे शरीर में प्रवेश कर गया है. इस के अतिरिक्त अमीवा रोग का कारण बनी हुई पिशाची को विमुख कर के दूर ले जाओ, जिस से वह हमारे पास न आ सके. हमारे द्वारा किए हुए पाप को भी हम से दूर करो. (१) सोमारुद्रा युवमेतान्यस्मद् विश्वा तनूषु भेषजानि धत्तम्. अव स्यतं मुञ्चतं यन्नो असत् तनूषु बद्धं कृतमेनो अस्मत्.. (२) हे सोम एवं रुद्र देव! तुम दोनों हमारे शरीरों में रोगों को निकालने वाली जड़ीबूटियों को ebook converter DEMO Watermarks*