अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 380, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंबिगाड़ने वाले तथा दावाग्नि के जलाने के समान क्रोध करते हुए सामने वाले पुरुष को मेरे विषय में प्रयोग की जाती हुई ईर्ष्या को इस प्रकार शांत करो, जिस प्रकार शीतल जल डालने से अग्नि शांत कर दी जाती है. (१) सूक्त-४८ देवता—सिनीवाली सिनीवालि पृथुष्टुके या देवानाम्सि स्वसा. जुषस्व हव्यमाहुतं प्रजां देवि दिदिड्ढि नः.. (१) हे सिनीवाली! अर्थात् ऐसी अमावस्या! जिस में चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तू बहुत से जनों द्वारा स्तुति की गई एवं देवों की बहन है. तू सामने डाले गए हव्य को स्वीकार कर तथा हमारे लिए पुत्र आदि के रूप में प्रजा प्रदान कर. (१) या सुबाहुः स्वङगुरिः सुषूमा बहुसूवरी. तस्यै विशपत्न्यै हविः सिनीवाल्यै जुहोतन.. (२) हे सिनीवाली! तू सुंदर हाथ वाली, शोभन उंगलियों वाली, सुंदर प्रसव वाली तथा बहुत सी प्रजाओं को जन्म देने वाली है. हे ऋत्विजो तथा यजमानो! प्रजाओं का पालन करने वाली उस सिनीवाली के लिए हवि दो. (२) या विशपत्नीन्द्रमसि प्रतीची सहस्त्रस्तुकाभियन्ती देवी. विष्णो पत्नि तुभ्यं राता हवींषिपतिं देवि राधसे चोदयस्व.. (३) जो सिनीवाली प्रजाओं का पालन करने वाली तथा परमैश्वर्य संपन्न इंद्र के सामने खड़ी होने वाली है तथा हजारों स्तोताओं द्वारा प्रशंसित एवं प्रकाशित होने वाली है. हे विष्णु अथवा इंद्र की पत्नी! तेरे लिए हवि दी गई है. हे देवी! तू प्रसन्न हो कर अपने पति इंद्र को हमें धन देने के लिए प्रेरित कर. (३) सूक्त-४९ देवता—कुहू कुहूं देवीं सुकृतं विद्मनापसमस्मिन् यज्ञे सुहवा जोहवीमि. सा नो रयिं विश्ववारं नि यच्छाद् ददातु वीरं शतदायमुक्थ्यम्.. (१) कुहू अथवा चंद्रमा दिखाई न देने वाली अमावस्या देवी को मैं इस यज्ञ में बुलाता हूं अथवा हवि से होम करता हूं. शोभन कर्म करने वाली, विदित कर्मों वाली एवं शोभन आह्वान वाली वह अमावस्या हमें सब के द्वारा वरणीय धन दे तथा अधिक धन देने वाला, प्रशंसनीय एवं वीर पुत्र प्रदान करे. (१) कुहूर्देवानाम्मृतस्य पत्नी हव्या नो अस्य हविषो जुषेत. ebook converter DEMO Watermarks*