भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 385, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 385

आयुर्यत् ते अतिहितं पराचैरपानः प्राणः पुनरा ताविताम्. अग्निष्टदाहार्निर्ऋतेरुपस्थात् तदात्मनि पुनरा वेशयामि ते.. (३) हे आयु की कामना करने वाले पुरुष! तुम्हारा जो जीवन तुम्हें छोड़ कर और तुम्हारा अतिक्रमण कर के गया है, वह प्राण और अपान वायु की कृपा से पुनः वापस आ जाए. उस आयु का अग्नि ने निकृष्ट गति वाली मृत्यु के पास से हरण कर लिया है. अग्नि के द्वारा हरण कर के लाई गई उस आयु को मैं तेरे शरीर में पुनः स्थापित करता हूं. (३) मेमं प्राणो हासीन्मो अपानो ऽ वहाय परा गात्. सप्तर्षिभ्य एनं परि ददामि त एनं स्वस्ति जरसे वहन्तु.. (४) प्राण वायु इस आयु चाहने वाले पुरुष का त्याग न करे तथा अपान वायु भी इसे छोड़ कर न जाए. मैं इस पुरुष को रक्षा के हेतु सप्त ऋषियों के लिए सौंप रहा हूं. वे सात ऋषि अर्थात् सात प्राण इसे वृद्धावस्था तक ले जाएं. (४) प्र विशतं प्राणापानावड्वान्वाविव व्रजम्. अयं जरिम्णः शेवधिररिष्ट इह वर्धताम्.. (५) हे प्राण और अपान वायु! जिस प्रकार गाड़ी को खींचने वाले बैल गोठ में प्रवेश करते हैं, उसी प्रकार तुम आयु चाहने वाले पुरुष के शरीर में प्रवेश करो. वह आयु चाहने वाला पुरुष वृद्धावस्था की निधि बने. वह इस लोक में मृत्यु की बाधा से रहित हो कर जीवित रहे एवं वृद्धि को प्राप्त करे. (५) आ ते प्राणं सुवामसि परा यक्ष्मं सुवामि ते. आयुर्नो विश्वतो दधदयमग्निवरेण्यः.. (६) हे आयु चाहने वाले पुरुष! हम तेरे प्राण को वापस बुलाते हैं. हम तेरी आयु के प्रतिबंधक यक्ष्मा रोग को पीछे हटने के लिए प्रेरित करते हैं. वे वरेण्य एवं हवन किए जाते हुए अग्नि देव हमारे इस यजमान को सभी प्रकार से सौ वर्ष की आयु प्रदान करें. (६) उद् वयं तमस्परि रोहन्तो नाकमृत्तमम्. देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम्.. (७) पाप से ऊपर उठे हुए हम उत्तम एवं दुःख रहित स्वर्ग में आरोहण करें. इस के पश्चात हम उत्तम एवं ज्योतिरूप में प्रकाशित सूर्य देव के समीप जाएं. (७) सूक्त-५६ देवता—इंद्र ऋचं साम यजामहे याभ्यां कर्माणि कुर्वते. एते सदसि राजतो यज्ञं देवेषु यच्छतः.. (१) ebook converter DEMO Watermarks*