अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 399, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंविजाम्नि या अपचितः स्वयंस्स्रः.. (२) जो गंडमालाएं गले में होती हैं, बगल में होती हैं और गोपनीय स्थानों में होती हैं, वे सब बिना पकी हुई गंडमालाएं पक कर फूट जाएं. (२) यः कीकसाः प्रशृणाति तलीद्यमवतिष्ठति. निर्हास्तं सर्वं जाया्न्यं यः कश्च ककुदि श्रितः.. (३) जो कष्टसाध्य राजयक्ष्मा रोग हड्डियों में व्याप्त होता है, जो अस्थियों के समीप वाले मांस को सुखाता है, जो गरदन के ऊपर वाले भाग को पतला कर देता है तथा जो पत्नी के निरंतर संभोग से उत्पन्न होता है, इन सभी प्रकार के क्षय रोगों को यह जड़ी नष्ट करे. (३) पक्षी जाया्न्यः पतति स आविशति पूरुषम्. तदक्षितस्य भेषजमुभयोः सुक्षतस्य च.. (४) क्षय रोग पक्षी बन कर गिरता है तथा पुरुष में प्रवेश करता है. हम शरीर की सभी धातुओं का शोषण करने वाले तथा शोषण न करने वाले दोनों प्रकार के रोगों को मंत्र और ओषधि से दूर करते हैं. (४) सूक्त-८१ देवता—इंद्र विद्म वै ते जाया्न्य जानं यतो जाया्न्य जायसे. कथं ह तत्र त्वं हनो यस्य कृण्मो हविर्गृहे.. (१) हे क्षय रोग! हम तेरी उत्पत्ति के उस स्थान को जानते हैं, जहां से तू जन्म लेता है. तेरी उत्पत्ति के स्थान को जानते हुए हम यजमान के घर में इंद्र आदि देवों के लिए तुझे देते हैं. (१) धृषत् पिब कलशे सोममिन्द्र वृत्रहा शूर समरे वसूनाम्. माध्यन्दिने सवन आ वृषस्व रयिष्ठानो रयिमस्मासु धेहि.. (२) हे शत्रुओं को दलित करने वाले इंद्र! द्रोण कलश में स्थित सोमरस का पान करो. हे शूर एवं वृत्र का हनन करने वाले इंद्र! तुम धन संबंधी युद्धों के निमित्त अर्थात् हमें धन प्राप्त कराने के लिए सोमपान करो. तुम हमारे माध्यंदिन यज्ञ में भरपेट सोमरस पियो. तुम धन के अधिष्ठान हो, इसीलिए हमें धन प्रदान करो. (२) सूक्त-८२ देवता—मरुत् सांतपना इदं हविर्मरुतस्तज्जुजुष्टन. अस्माकोती रिशादसः.. (१) हे संतपन अर्थात् सूर्य से संबंधित अथवा संताप के समय अर्थात् दोपहर में यज्ञ करने ebook converter DEMO Watermarks*