भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 438, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 438

कुल्हाड़ी वृक्षों को काटने के लिए उठती है. प्राप्त होने वाले राक्षसों को इंद्र देव मिट्टी के बर्तनों के समान काटते हुए आएं. (२१) उलूकयातुं शुशुलूकयातुं जहि श्वयातुमुत कोकयातुम्. सुपर्णयातुमुत गृध्रयातुं दृषदेव प्र मृण रक्ष इन्द्र.. (२२) हे इंद्र! जो राक्षस परिवारों के साथ आते हैं, जो अकेले आते हैं, जो कुत्तों, चकवों, गरुड़ एवं गिद्ध के समान आक्रमण करते हैं, उन का विनाश करो. जिस प्रकार पत्थर से मिट्टी का पात्र तोड़ा जाता है, उसी प्रकार अनेक आकारों में वर्तमान राक्षसों को मारो. (२२) मा नो रक्षो अभि नड् यातुमावदपोच्छन्तु मिथुना ये किमीदिनः. पृथिवी नः पार्थिवात् पात्वंहसो ऽ न्तरिक्षं दिव्यात् पात्वस्मान्.. (२३) हमें हिंसक राक्षस जाति प्राप्त न करे. अब किसे खाएं, अब किसे खाएं— ऐसा कहते हुए जो राक्षस जोड़े अर्थात् स्त्रीपुरुष घूमते हैं, वे दूर चले जाएं. पृथ्वी माता हमें राक्षस, पिशाच आदि द्वारा किए गए पाप से बचाएं. (२३) इन्द्र जहि पुमांसं यातुधानमुत स्त्रियं मायया शाशदानाम्. विग्रीवासो मूरदेवा ऋदन्तु मा ते दृशन्त्सूर्यमुच्चरन्तम्.. (२४) हे इंद्र! तुम पुरुष रूपधारी राक्षस का वध करो तथा दूसरों को माया के द्वारा हिंसित करने वाली स्त्री रूप धारिणी राक्षसी का वध करो. मृत्यु जिन के लिए खेल है, ऐसे राक्षसों की गरदनें कट जाएं और वे मर जाएं. वे उदय होते हुए सूर्य को न देखें. (२४) प्रति चक्ष्व वि चक्ष्वेन्द्रश्च सोम जागृतम्. रक्षोभ्यो वधमस्यतमशनिं यातुमद्भ्यः.. (२५) हे इंद्र एवं सोम! तुम प्रत्येक राक्षस को अपने प्रतिकूल देखो तथा विविध राक्षसों को अपने विपरीत समझो. तुम दोनों हमारी रक्षा के लिए जाग्रत रहो और हिंसक राक्षसों के वध के लिए अपना आयुध वज्र चलाओ. (२५) सूक्त-५ देवता—मंत्र में बताए गए अयं प्रतिसरो मणिवीरो वीराय बध्यते. वीर्यवान्त्सपत्नहा शूरवीरः परिपाणः सुमङ्गलः.. (१) तिलक वृक्ष से निर्मित यह मणि कृत्या राक्षसी को उसी के पास लौटा देती है, जो उसे किसी पर जादू टोने के रूप में भेजता है. यह वीरकर्म करने वाले शत्रुओं को भगाने में समर्थ है. यह मणि अतिशय शक्तिशालीनी, शत्रु घातक एवं यजमान की रक्षा करने वाले पुरोहित का मंगल करने वाली है. (१) ebook converter DEMO Watermarks*