भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 445, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 445

मचाते हैं, इन सब को मैं गर्भिणी के पास से भगाता हूं. (११) ये सूर्यं न तितिक्षन्त आतपन्तममुं दिवः. अरायान् बस्तवासिनो दुर्गन्धींल्लोहितास्यान् मककान् नाशयामसि.. (१२) जो विशेष प्राणी आकाश में सभी ओर चलते हुए इन सूर्य को सहन नहीं करते हैं जो श्रीविहीन हैं, भेड़ का चमड़ा पहनते हैं, दुर्गंध वाले हैं, सदा मांस खाने के कारण जिन का मुंह लाल रहता है एवं जिन की चाल बुरी है, ऐसे पिशाचों का मैं नाश करता हूं. (१२) य आत्मानमतिमात्रमंस आधाय बिभ्रति. स्त्रीणां श्रोणिप्रतोदिन इन्द्र रक्षांसि नाशय.. (१३) जो पिशाच गर्भिणी नारियों के स्थूल शरीर को कंधे पर धारण करते हैं तथा जो गर्भिणी स्त्रियों की कमर को अत्यधिक व्यथित करते हैं, हे इंद्र! उन राक्षसों का विनाश करो. (१३) ये पूर्वे वध्वो ३ यन्ति हस्ते शृङ्गाणि बिभ्रतः. आपाकेष्ठाः प्रहासिन स्तम्बे ये कुर्वते ज्योतिस्तानितो नाशयामसि.. (१४) जो पिशाच अपने बजाने के लिए अथवा पीने के लिए अपने हाथों में सींग ले कर अपनी पत्नियों के साथ घूमते हैं जो पाकशालाओं अथवा कुम्हारों के घरों में स्थित हैं, जो अट्टहास करते हैं तथा जो घर के खंभों पर अग्नि का रूप बना लेते हैं, उन सब को हम गर्भिणी के निवास स्थान से दूर भगाते हैं. (१४) येषां पश्चात् प्रपदानि पुरः पार्ष्णीः पुरो मुखा. खलजाः शकधूमजा उरुण्डा ये च मट्मटाः कुम्भमुष्का अयाशवः. तानस्या ब्रह्मणस्पते प्रतीबोधेन नाशय.. (१५) जिन राक्षसों के पंजे पीछे की ओर हैं, एड़ियां तथा मुख आगे की ओर हैं, जो खलिहान में जन्मे हैं, जो गाय, घोड़े आदि के गोबर से उत्पन्न हुए हैं, जो शीर्ष रहित हैं, जो मुटमुट शब्द करते हैं, जिन के मुंह घोड़े के समान हैं तथा जो वायु के समान तेज चलते हैं, हे ब्रह्मणस्पति! उन सब को निरोध के साधन इस सरसों के द्वारा नष्ट करो. (१५) पर्यस्ताक्षा अप्रचङ्कशा अस्रैणाः सन्तु पण्डगाः. अव भेषज पादय य इमां संविवृत्सत्यपतिः स्वपतिं स्त्रियम्.. (१६) इधरउधर फैली हुई आंखों वाले, पतली जंघाओं वाले एवं पैरों से न चलने वाले जो पिशाच हैं, वे बिना स्त्रियों वाले हो जाएं. हे सरसों रूपी ओषधि! तुम उन्हें नीचे की ओर मुंह कर के गिराओ. जो अनियंत्रित पिशाच इस पति वाली गर्भिणी स्त्री को वश में करना चाहते हैं, उन का विनाश करो. (१६) ebook converter DEMO Watermarks*