भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 473, कुल 1063 में से

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है. इसीलिए यज्ञोपवीत धारण करने वाला इस बात के लिए तत्पर हो जाए कि प्रजापति मुझे जाने. जो इस बात को जानता है, वही प्रजापति के पश्चात जन्म लेने वाला समझा जाता है. (२४) सूक्त-२ देवता—काम सपत्नहनमृषभं घृतेन कामं शिक्षामि हविषाज्येन. नीचैः सपत्नान् मम पादय त्वमभिष्टुतो महता वीर्येण.. (१) मैं शत्रु विनाशक वृषभ रूपी काम को हवि एवं आज्य से प्रसन्न करता हूं. हे वृषभ! तुम्हारी स्तुति करने वाले मुझ स्तोता के शत्रुओं को तुम अपने महान पराक्रम से नीचे गिराओ. (१) यन्मे मनसो न प्रियं न चक्षुषो यन्मे बभस्ति नाभिनन्दति. तद् दुष्ष्वप्न्यं प्रति मुञ्चामि सपत्ने कामं स्तुत्वोदहं भिदेयम्.. (२) जो बुरा स्वप्न न मुझ को अच्छा लगता है और न मेरे नेत्रों को सुहाता है, जो मुझे भक्षण करता हुआ मालूम होता है और मुझे प्रसन्न नहीं करता, उस बुरे स्वप्न को काम की स्तुति करने वाला मैं शत्रु की ओर छोड़ता हूं. वह बुरा स्वप्न रूपी शत्रु का भेदन करे. (२) दुष्ष्वप्न्यं काम दुरितं च कामाप्रजस्तामस्वगतामवर्तिम्. उग्र ईशानः प्रति मुञ्च तस्मिन् यो अस्मभ्यमंहूरणा चिकित्सात्.. (३) हे उग्र एवं स्वामी कामदेव! तुम अपने स्वप्न रूपी पाप को प्रजा अर्थात् संतान की हीनता को एवं निर्धनता को उसी और भेजो जो पराजय कर के हमें विपत्ति में डालने की चेष्टा करता है. (३) नुदस्व काम प्र णुदस्व कामावर्तिं यन्तु मम ये सपत्नाः. तेषां नुत्तानामधमा तमांस्यग्ने वास्तूनि निर्दह त्वम्.. (४) हे कामदेव! दरिद्रता को उन की और जाने के लिए प्रेरित करो जो मेरे शत्रु हैं. वे ही मेरी दरिद्रता को प्राप्त करें. हे अग्नि! वे अंधकार में पड़े रहें. तुम उन के घर की वस्तुओं को भस्म कर दो. (४) सा ते काम दुहिता धेनुरुच्यते यामाहुर्वाचं कवयो विराजम्. तया सपत्नान् परि वृङ्ग्धि ये मम पर्येनान् प्राणः पशवो जीवनं वृणक्तु.. (५) हे कामदेव! सभी जिसे ओजपूर्ण वाणी कहते हैं, वह तुम्हारी पुत्री है. तुम उस के द्वारा मेरे शत्रुओं का नाश करो. प्राण, पशु और जीवन उन के पास न रहें. (५) ebook converter DEMO Watermarks*

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