अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 491, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंजो कुर्वती नामक ऋतु को निश्चित रूप से जानता है, वह कुर्वती का ज्ञान करता हुआ भी अप्रिय शत्रुओं तथा बांधवों के ऐश्वर्य को छीन लेता है. यह जो कुर्वती नाम की ऋतु है, वह पंचौदन रूप अज ही है. यह जानने वाला व्यक्ति अपने अप्रिय शत्रुओं एवं बांधवों के ऐश्वर्य को अपनी शक्ति से जला डालता है तथा दक्षिणा से प्रकाशित होते हुए अज को पंचौदन के रूप में दान करता है. (३२) यो वै संयन्तं नामर्तुं वेद. संयतींसंयतीमेवाप्रियस्य भ्रातृव्यस्य श्रियमा दत्ते. एष वै संयन्नामर्तुर्यदजः पञ्चौदनः. निरेवाप्रियस्य भ्रातृव्यस्य श्रियं दहति भवत्यात्मना. यो ३ जं पञ्चौदनं दक्षिणाज्योतिषं ददाति.. (३३) जो संयती नामक ऋतु को निश्चित रूप से जानता है, वह समझता है कि यह पंचौदन रूप अज है, वही संयंती नाम की ऋतु है. जो दक्षिणा से प्रकाशित अज को पंचौदन के रूप में दान करता है, वह अपने अप्रिय वस्तुओं तथा बांधवों के ऐश्वर्य को अपने बल से जला देता है. (३३) यो वै पिन्वन्तं नामर्तुं वेद. पिन्वतींपिन्वतीमेवाप्रियस्य भ्रातृव्यस्य श्रियमा दत्ते. एष वै पिन्वन्नामर्तुर्यदजः पञ्चौदनः. निरेवाप्रियस्य भ्रातृव्यस्य श्रियं दहति भवत्यात्मना. यो३जं पञ्चौदनं दक्षिणाज्योतिषं ददाति.. (३४) जो पिन्वंती नाम की ऋतु को जानता है, वह पिन्वंती को जानता हुआ ही अप्रिय शत्रुओं एवं बांधवों के ऐश्वर्य को ग्रहण करता है. यह जो पंचौदन रूप अज है, यही पिन्वंती नाम की ऋतु है. जो पुरुष दक्षिणा से प्रकाशित अज को पंचौदन के रूप में देता है, वह अपने अप्रिय शत्रुओं एवं बांधवों के ऐश्वर्य को अपनी शक्ति से जला देता है. (३४) यो वा उद्यन्तं नामर्तुं वेद. उद्यतीमुद्यतीमेवाप्रियस्य भ्रातृव्यस्य श्रियमा दत्ते. एष वा उद्यन्नामर्तुर्यदजः पञ्चौदनः. निरेवाप्रियस्य भ्रातृव्यस्य श्रियं दहति भवत्यात्मना. यो ३ जं पञ्चौदनं दक्षिणाज्योतिषं ददाति.. (३५) जो उद्यंती नाम की ऋतु को जानता है, वह अपने अप्रिय शत्रुओं और बांधवों की संपत्ति को ग्रहण करता है. वह समझता है कि यह पंचौदन रूप अज ही उद्यंती नाम की ऋतु है. जो दक्षिणा से प्रकाशित अज को पंचौदन के रूप में देता है, वह अपने अप्रिय शत्रुओं एवं बांधवों के ऐश्वर्य को अपने तेज से जला डालता है. (३५) ebook converter DEMO Watermarks*