अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंप्रसव की देवता पूषा गर्भ को जरायु के बंधन से अलग करें. हम भी सुखपूर्वक प्रसव के लिए योनि मार्ग को खोल रहे हैं. तुम भी सुखपूर्वक प्रसव के लिए योनि मार्ग को शिथिल करो. हे सूतिमारुत देव! आप भी गर्भ का मुख नीचे को कर के उसे बाहर निकलने हेतु प्रेरित करो. (३) नेव मांसे न पीवसि नेव मज्जस्वाहतम्. अवैतु पृश्नि शेवलं शुने जरायुक्त्तवे ऽ व जरायु पद्यताम्.. (४) हे प्रसव करने वाली नाड़ी! तू इस उदरगत जरायु से पुष्ट नहीं होगी, क्योंकि इस का संबंध मांस, मज्जा आदि से नहीं है. इसलिए उजले रंग की यह जरायु दोनों के ऊपर तैरने वाली काई के समान नीचे गिर जाए. इसे कुत्ते के खाने के लिए नीचे गिर जाने दें. (४) वि ते भिनद्मि मेहनं वि योनिं वि गवीनिके. वि मातरं च पुत्रं च वि कुमारं जरायुणाव जरायु पद्यताम्.. (५) हे गर्भिणी! मैं गर्भस्थ बालक को बाहर निकालने के लिए मूत्रमार्ग को फैलाता हूं तथा योनि के आसपास की नाड़ियों को भी फैलाता हूं. क्योंकि ये प्रसव में बाधा डालती हैं. मैं माता और पुत्र को अलगअलग करता हूं. इस के बाद मैं पुत्र को जरायु से अलग करता हूं. जरायु गर्भाशय से नीचे गिर जाए. (५) यथा वातो यथा मनो यथा पतन्ति पक्षिण:. एवा त्वं दशमास्य साकं जरायुणा पताव जरायु पद्यताम्.. (६) हे दशमास गर्भस्थ शिशु! जिस प्रकार वायु, मन एवं आकाश में उड़ने वाले पक्षी आकाश में बिना रोकटोक के विचरण करते हैं, उसी प्रकार तू जरायु के साथ गर्भ से बाहर आ. जरायु गर्भाशय से नीचे गिरे. (६) सूक्त-१२ देवता—यक्ष्मानाशन जरायुज: प्रथम उस्रिया वृषा वाताभ्रजा स्तनयन्नेति वृष्ट्या. स नो मृडाति तन्व ऋजुगो रुजन् य एकमोजस्त्रेधा विचक्रमे.. (१) नक्षत्रों को पराजित कर के प्रकट होने वाले, संसार में सब से प्रथम उत्पन्न एवं वायु के समान शीघ्रगामी सूर्य बादलों को गर्जन करने के लिए प्रेरित करते हुए वर्षा के साथ आते हैं. वे सूर्य त्रिदोष से उत्पन्न रोग आदि का विनाश करते हुए हमारी रक्षा करें. सीधे चलने वाले जो सूर्य एक हो कर भी अपने तेज को तीन प्रकार से प्रकाशित करते हैं, वे हमें सुख प्रदान करें. (१) अङ्गेअङ्गे शोचिषा शिश्रियाणं नमस्यन्तस्त्वा हविषा विधेम. eBook converter DEMO Watermarks*