भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 528, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 528

अयं ते कृत्यां विततां पौरुषेयादयं भयात्. अयं त्वा सर्वस्मात् पापाद् वरणो वारयिष्यते.. (४) तेरे निमित्त जो कृत्या बनाई गई है, यह वरण वृक्ष से निर्मित मणि उस को प्रभावहीन बना देगी एवं तुझे भयरहित कर देगी. दिव्य वनस्पति से निर्मित यह मणि तेरे सभी पापों का विनाश कर देगी. (४) वरणो वारयाता अयं देवो वनस्पतिः. यक्ष्मो यो अस्मिन्नाविष्टस्तमु देवा अवीवरन्.. (५) दिव्य गुणों से संपन्न यह वरण वृक्ष से निर्मित मणि हमारे शरीर में प्रविष्ट यक्ष्मा रोग के साथ हमारे शत्रुओं को भी समाप्त कर देगी. (५) स्वप्नं सुप्त्वा यदि पश्यासि पापं मृगः सृतिं यदि धावादजुष्टाम्. परिक्षवाच्छकुनेः पापवादादयं मणिवरणो वारयिष्यते.. (६) हे पुरुष! वरण वृक्ष से निर्मित यह मणि पापपूर्ण स्वप्न के भय से, अनिच्छित दिशा की ओर दौड़ने वाले मृग से, छींक से तथा कौआ आदि पक्षी से संबंधित अपशकुनों से तुझे बचाएगी. (६) अरात्यास्त्वा निर्ऋत्या अभिचारादथो भयात्. मृत्योरोजीयसो वधाद् वरणो वारयिष्यते.. (७) हे पुरुष! यह मणि शत्रु से, निर्ऋति नामक पाप देवता से, जादूटोने के भय से तथा मृत्यु से तुम्हारी रक्षा करे. (७) यन्मे माता यन्मे पिता भ्रातरो यच्च मे स्वा यदेनश्चकृमा वयम्. ततो नो वारयिष्यते ऽ यं देवो वनस्पतिः.. (८) यह वनस्पति से निर्मित दिव्य गुण वाली मणि मेरी माता, मेरे पिता, मेरे भ्राता और मुझे किए गए समस्त पापों से बचाएगी. (८) वरणेन प्रव्यथिता भ्रातृव्या मे सबन्धवः. असूर्तं रजो अप्यगुस्ते यन्त्वधमं तमः.. (९) मेरे जो बांधव एवं भतीजे मुझ से शत्रुता रखते हैं, वे वरण वृक्ष से निर्मित इस मणि के प्रभाव से व्यथित हों. वे कष्टदायिनी धूल को प्राप्त हों तथा घने अंधकार में प्रवेश करें. (९) अरिष्टो ऽ हमरिष्टगुरायुष्मान्त्सर्वपूरुषः. तं मा ऽ यं वरणो मणिः परि पातु दिशोदिशः.. (१०) ebook converter DEMO Watermarks*