अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 536, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंतथा तुम ही इंद्र के ऐश्वर्य हो. मैं तुम्हें क्षत्रिय संबंधी योगों से युक्त कर के विजय दिलाने वाले योग की क्षमता वाला बनाता हूं. (२) इन्द्रस्यौज स्थेन्द्रस्य सह स्थेन्द्रस्य बलं स्थेन्द्रस्य वीर्यं १ स्थेन्द्रस्य नृम्णं स्थ. जिष्णवे योगायेन्द्रयोगैर्वो युनज्मि.. (३) हे जलो! तुम इंद्र के ओज, बल एवं वीर्य हो. तुम ही इंद्र को नवीन बनाने वाली शक्ति एवं तुम ही इंद्र के ऐश्वर्य हो. मैं तुम्हें इंद्र संबंधी योगों से युक्त कर के विजय दिलाने वाले योग की क्षमता वाला बनाता हूं. (३) इन्द्रस्यौज स्थेन्द्रस्य सह स्थेन्द्रस्य बलं स्थेन्द्रस्य वीर्यं १ स्थेन्द्रस्य नृम्णं स्थ. जिष्णवे योगाय सोमयोगैर्वो युनज्मि.. (४) हे जलो! तुम इंद्र के ओज, वीर्य एवं बल हो. तुम ही इंद्र को नवीन बनाने वाली शक्ति एवं ऐश्वर्य प्रदान करने वाले हो. मैं तुम्हें जल संबंधी योग से युक्त करता हूं, जिस से मैं विजय प्राप्त कर सकूं. (४) इन्द्रस्यौज स्थेन्द्रस्य सह स्थेन्द्रस्य बलं स्थेन्द्रस्य वीर्यं १ स्थेन्द्रस्य नृम्णं स्थ. जिष्णवे योगायाप्सुयोगैर्वो युनज्मि.. (५) हे जलो! तुम इंद्र के ओज, बल एवं वीर्य हो. तुम ही इंद्र को नवीन बनाने वाली शक्ति हो एवं तुम ही इंद्र के ऐश्वर्य हो. मैं विजय प्राप्त करने वाले योग के हेतु तुम्हें अपने समीप रखना चाहता हूं. समस्त प्राणी मेरे समीप रहें. (५) इन्द्रस्यौज स्थेन्द्रस्य सह स्थेन्द्रस्य बलं स्थेन्द्रस्य वीर्यं १ स्थेन्द्रस्य नृम्णं स्थ. जिष्णवे योगाय विश्वानि मा भूतान्युप तिष्ठन्तु युक्ता म आप स्थ.. (६) हे जलो! तुम अग्नि के भाग हो. जलों से मुक्त भाग को एवं दिव्य तेज को हम में धारण करो. अग्नि का भाग इस लोक के प्रजापति के तेज से युक्त हो. (६) अग्नेर्भाग स्थ. अपां शुक्रमापो देवीर्वर्चो अस्मासु धत्त. प्रजापतेर्वो धाम्ना ऽ स्मै लोकाय सादये.. (७) हे जलो! तुम इंद्र के भाग को, जलों के वीर्य एवं दिव्य तेज को हम में स्थित करो. लोक का कल्याण करने के लिए प्रजापति का तेज हम में धारण करो. (७) ebook converter DEMO Watermarks*