अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 554, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंएवं एक ऋषि जिस में समाया हुआ है, उस परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१४) यत्रामृतं च मृत्युश्च पुरुषे ऽ धि समाहिते. समुद्रो यस्य नाड्य १: पुरुषे ऽ धि समाहिता: स्कम्भं तं ब्रूहि कतम: स्विदेव स:.. (१५) जिस आदि पुरुष में अमृत और मृत्यु स्थित हैं तथा सागर जिस आदि पुरुष की नाड़ियों में समाया हुआ है, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१५) यस्य चतस्र: प्रदिशो नाड्य १ स्तिष्ठन्ति प्रथमा:. यज्ञो यत्र पराक्रान्त: स्कम्भं तं ब्रूहि कतम: स्विदेव स:.. (१६) जिस आदि पुरुष के शरीर में प्रथम कल्पित पूर्व, पश्चिम आदि चार दिशाएं नाड़ियों के रूप में स्थित है तथा यज्ञ जहां पराक्रम करता है, उस परमेश्वर के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१६) ये पुरुषे ब्रह्म विदुस्ते विदु: परमेष्ठिनम्. यो वेद परमेष्ठिनं यश्च वेद प्रजापतिम्. ज्येष्ठं ये ब्राह्मणं विदुस्ते स्कम्भमनुसंविदु:.. (१७) जो इस आदि पुरुष में ब्रह्म को स्थित जानते हैं, वे परमेष्ठी को जानते हैं. जो परमेष्ठी एवं प्रजापति को जानता है तथा जो उत्तम ब्राह्मण को जानता है, वह परमात्मा को भलीभांति जानता है. (१७) यस्य शिरो वैश्वानरश्चक्षुरङ्गिरसो ऽ भवन्. अङ्गानि यस्य यातव: स्कम्भं तं ब्रूहि कतम: स्विदेव स:.. (१८) जिस का शीश वैश्वानर अग्नि और नेत्र अंगिरस हुए, जिस के अंग ही राक्षस बने, उस परमात्मा के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१८) यस्य ब्रह्म मुखमाहुजिह्वां मधुकशामुत. विराजमूधो यस्याहु: स्कम्भं तं ब्रूहि कतम: स्विदेव स:.. (१९) ब्रह्म जिस का मुख कहा गया है, मधुकशा जिस की जीभ बताई गई है एवं विराट् ऐन कहा गया है, उस ब्रह्म के विषय में बताओ कि वह कौन है? (१९) यस्मादृचो अपातक्षन् यजुर्यस्मादपाकषन्. सामानि यस्य लोमान्यथर्वा ऽ ङ्गिरसो मुखं स्कम्भं तं ब्रूहि कतम: स्विदेव स:.. (२०) ebook converter DEMO Watermarks*