अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 571, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंजानता हूं. (३) यया द्यौर्यया पृथिवी ययापो गुपिता इमाः. वशां सहस्रधारां ब्रह्मणाच्छावदामसि.. (४) जिस के द्वारा द्यौ, जिस के द्वारा पृथ्वी तथा जिस के द्वारा ये जल सुरक्षित हैं, दूध की हजार धाराएं बहाने वाली वशा की हम वेद मंत्रों द्वारा प्रशंसा करते हैं (४) शतं कंसाः शतं दोग्धारः शतं गोप्तारो अधि पृष्ठे अस्याः. ये देवास्तस्यां प्राणन्ति ते वशां विदुरेकधा.. (५) इस वशा गौ की पीठ पर दुग्ध पात्र लिए हुए सौ दूध काढ़ने वाले एवं सौ रक्षक हैं. जो देव इस गौ के कारण सांस लेते हैं अर्थात् जीवित हैं, एकमात्र वे ही इस गौ को जानते हैं. (५) यज्ञपदीराक्षीरा स्वधाप्राणा महीलुका. वशा पर्जन्यपत्नी देवां अप्येति ब्रह्मणा.. (६) जिस वशा गौ को यज्ञ में स्थान प्राप्त है, जो अत्यधिक दूध देती है, स्वधा जिस के प्राण हैं तथा जो धरती पर परम प्रसिद्ध है, उस का वर्षा के कारण उत्पन्न घास से पालनपोषण होता है, वह वशा गौ यज्ञ के द्वारा देवों को तृप्त करती है. (६) अनु त्वाग्निः प्राविशदनु सोमो वशे त्वा. ऊधस्ते भद्रे पर्जन्यो विद्युतस्ते स्तना वशे.. (७) हे वशा गौ! अग्नि ने तुझ में प्रवेश किया था तथा सोम भी तुझ में प्रविष्ट हुआ था. पर्जन्य अर्थात् बादल ने तेरे एन में और बिजली ने तेरे थनों में निवास किया था. (७) अपस्त्वं धुक्षे प्रथमा उर्वरा अपरा वशे. तृतीयं राष्ट्रं धुक्षे ऽ नं क्षीरं वशे त्वम्.. (८) हे वशा गौ! सब से पहले तू जलों को दोहन के रूप में प्रदान करती है. इस के पश्चात भूमि को उपजाऊ बना कर हमें अन्न देती है. तीसरे तू राष्ट्र को शक्तिरूपी क्षीर प्रदान करती है. (८) यदादित्यैर्हूयमानोपातिष्ठ ऋतावरि. इन्द्रः सहस्रं पात्रान्तसोमं त्वापाययद् वशे.. (९) हे ऋतावरी अर्थात् दूध देने वाली गौ! तू आदित्यों द्वारा बुलाए जाने पर समीप आई थी. हे वशा गौ! तब इंद्र ने हजारों पात्र ले कर तुझे सोमरस पिलाया था. (९) यदनूचीन्द्रमैरात् त्व ऋषभो ऽ ह्वयत्. ebook converter DEMO Watermarks*