अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 573, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंतद् भद्राः समगच्छन्त वशा देष्ट्र्यथो स्वधा. अथर्वा यत्र दीक्षितो बर्हिष्यास्त हिरण्यये.. (१७) यज्ञ में दीक्षित अथर्ववेद के मंत्रों का ज्ञाता ब्राह्मण जहां स्वर्णमय कुशों के आसन पर बैठता है, वहां भद्र पुरुष अथवा कल्याणकारी तत्त्व एकत्र होते हैं, वहां वशा गौ अन्न देने वाली एवं यज्ञ के साधन के रूप में उपस्थित होती है. (१७) वशा माता राजन्यस्य वशा माता स्वधे तव. वशाया यज्ञ आयुधं ततश्चित्तमजायत.. (१८) हे वशा गौ! तू क्षत्रिय की माता है. हे स्वधा अर्थात् अन्न! वशा गौ तेरी माता है. यज्ञ वशा गौ का आयुध है. वशा गौ में ही चित्त अर्थात् बुद्धि उत्पन्न हुई है. (१८) ऊर्ध्वो बिन्दुरुदचरद् ब्रह्मणः ककुदादधि. ततस्त्वं जज्ञिषे वशे ततो होताजायत.. (१९) ब्रह्म के ककुद अर्थात् ऊपर वाले भाग से एक बूंद उछली. हे वशा गौ! तू उसी बूंद से उत्पन्न हुई है तथा उसी बूंद से हवन करने वाले होता उत्पन्न हुए हैं. (१९) आस्नस्ते गाथा अभवन्नुष्णिहाभ्यो बलं वशे. पाजस्याज्जज्ञे यज्ञ स्तनेभ्यो रश्मयस्तव.. (२०) हे वशा गौ! तेरे मुख से गाथाएं उत्पन्न हुईं तथा तेरी गरदन से बल की उत्पत्ति हुई. तेरे ऐन से यज्ञ उत्पन्न हुआ तथा तेरे थनों से किरणें उत्पन्न हुईं. (२०) ईर्माभ्यामयनं जातं सक्थिभ्यां च वशे तव. आन्त्रेभ्यो जज्ञिरे अत्रा उदरादधि वीरुधः.. (२१) हे वशा गौ! तेरे बाहुओं अर्थात् अगली टांगों और पिछले पैरों से तेरा चलना होता है. तेरी आंतों से अनेक पदार्थ उत्पन्न हुए तथा तेरे पेट से वृक्ष उत्पन्न हुए. (२१) यदुदरं वरुणस्यानुप्राविशथा वशे. ततस्त्वा ब्रह्मोदह्वयत् स हि नेत्रमवेत् तव.. (२२) हे वशा गौ! वरुण के उदर में तेरा प्रवेश हुआ. इस के पश्चात ब्रह्म ने तेरा आह्वान किया. वही तेरा नेत्र जानता है. (२२) सर्वे गर्भादवेपन्त जायमानादसूस्र्वः. ससूव हि तामाहुर्वशेति ब्रह्माभिः क्लृप्तः स ह्यस्या बन्धुः.. (२३) प्राणहीन उत्पन्न होने वाले गर्भ से सभी कांपने लगे. उस ने कहा कि हे वशा! तू बच्चे ebook converter DEMO Watermarks*