अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 58, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त-१९ देवता—इंद्र आदि मा नो विदन् विव्याधिनो मो अभिव्याधिनो विदन्. आराच्छरव्या अस्मद्विषूचीरिन्द्र पातय.. (१) अस्त्रशस्त्र आदि से ताड़ित करने वाले जो शत्रु हैं, वे हमें प्राप्त न कर सकें. सामने आ कर हिंसा करने वाले हमें न पा सकें. हे परम ऐश्वर्य संपन्न इंद्र देव! शत्रुओं द्वारा बारबार छोड़े गए अनेक प्रकार के मुखों वाले जो बाण हैं, उन्हें हम से दूर स्थान में गिराओ. (१) विष्वञ्चो अस्मच्छरवः पतन्तु ये अस्ता ये चास्याः. दैवीर्मनुष्येषवो ममामित्रान् वि विध्यत्.. (२) जो बाण शत्रुओं द्वारा धनुष से छोड़े जा रहे हैं अथवा जो बाण छोड़ने के लिए तरकस में सुरक्षित हैं, वे हम से दूर रहें. जो दैवी एवं मानवीय अस्त्रशस्त्र हैं, वे जा कर हमारे शत्रुओं को वेध डालें. (२) यो नः स्वो यो अरणः सजात उत निष्ट्यो यो अस्माँ अभिदासति. रुद्रः शरव्य यैतान् ममामित्रान् वि विध्यतु.. (३) हमारी जाति का अधिक बली, शत्रु समान शक्ति वाला अथवा निकृष्ट बलशाली जो मनुष्य हमें दास बनाना चाहता है, हमारे उन अमित्रों को, सब को रुलाने वाले संहार कर्ता देव रुद्र अपने बाणों से बींध डालें. (३) यः सपत्नो यो ऽ सपत्नो यश्च द्विषञ्छपाति नः. देवास्तं सर्वे धूर्वन्तु ब्रह्म वर्म ममान्तरम्.. (४) जो हमारी जाति का अथवा भिन्न जाति का पुरुष हम से द्वेष रखने के कारण हमें शाप देता है, इंद्र आदि सभी देव उस का विनाश करें. मेरे द्वारा प्रयोग किए गए मंत्र उस के शाप से मेरी रक्षा करें. (४) सूक्त-२० देवता—सोम, मरुत् आदि अदारसृद् भवतु देव सोमास्मिन् यज्ञे मरुतो मृडता नः. मा नो विददभिभा मो अशस्तिर्मो नो विदद् वृजिना द्वेष्या या.. (१) हे सोम देव! हमारा शत्रु अपने स्थान से भागा हुआ होने के कारण कभी भी अपनी स्त्री के पास न पहुंच सके. हे मरुत् देव! इस यज्ञ में आप हमारी रक्षा करें. सामने से आता हुआ तेजस्वी शत्रु मुझे प्राप्त न कर सके. कीर्ति और उन्नति के मार्ग में विघ्न डालने वाले पाप भी हमें न पा सकें. (१) eBook converter DEMO Watermarks*