अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 584, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअभीवर्गाद् दिवस्पर्यन्तरिक्षाय ते नमः.. (४) हे रुद्र! हम तुम्हें सामने से, उत्तर दिशा से एवं दक्षिण दिशा से नमस्कार करते हैं. प्रकाशपूर्ण आकाश के ऊपर वाले भाग में वर्तमान तुम्हारे लिए नमस्कार है. (४) मुखाय ते पशुपते यानि चक्षूंषि ते भव. त्वचे रूपाय संदृशे प्रतीचीनाय ते नमः.. (५) हे पशुपति! तुम्हारे मुख को नमस्कार है. हे भव! तुम्हारे तीन नेत्रों को नमस्कार है. तुम्हारे चर्म को, रूप को एवं सम्यक दर्शन की शक्ति को नमस्कार है. (५) अङ्गेभ्यस्त उदराय जिह्वाया आस्याय ते. दद्भ्यो गन्धाय ते नमः.. (६) हे पशुपति! तुम्हारे हाथ, पैर आदि अंगों को नमस्कार है. तुम्हारी जीभ को, मुख को, दांतों को और तुम्हारी गंध ग्राहक इंद्रिय नाक को नमस्कार है. (६) अस्त्रा नीलशिखण्डेन सहस्राक्षेण वाजिना. रुद्रेणार्धकघातिना तेन मा समरामहि.. (७) हम अस्त्र फेंकने वाले, नीले रंग के शिखंड अर्थात् मोर के पंखों से युक्त, हजार आंखों वाले, वेगशाली एवं सेना के आधे भाग का वध करने वाले रुद्र के द्वारा दुःखी न हों. (७) स नो भवः परि वृणक्तु विश्वत आप इवाग्निः परि वृणक्तु नो भवः. मा नो ऽ भि मांस्त नमो अस्त्वस्मै.. (८) बताए हुए प्रभाव वाले भव हमें सभी उपद्रवों से बचाएं. जिस प्रकार जलती हुई अग्नि जल का परित्याग करती है, उसी प्रकार भव हमें त्याग दें. वे हमें बाधा न पहुंचाएं. इस भव के लिए नमस्कार है. (८) चतुर्नमो अष्टकृत्वो भवाय दश कृत्वः पशुपते नमस्ते. तवेमे पञ्च पशवो विभक्ता गावो अश्वाः पुरुषा अजावयः.. (९) शर्व को चार बार और भव को आठ बार नमस्कार है. हे पशुपति! तुम्हें दस बार नमस्कार है. हे पशुपति! भिन्नभिन्न जाति वाले पांच पशु अर्थात् गाय, घोड़े, पुरुष, बकरियां और भेड़ें तुम्हारे ही हैं. इन की रक्षा करो. (९) तव चतस्रः प्रदिशस्तव द्यौस्तव पृथिवी तवेदमुरुग्रोवं १ न्तरिक्षम्. तवेदं सर्वमात्मन्वद् यत् प्राणत् पृथिवीमनु.. (१०) हे अतिशय बलशाली रुद्र! पूर्व आदि चार दिशाएं तुम्हारे अधिकार में हैं. द्यौ, पृथ्वी, विशाल अंतरिक्ष तथा आत्मा के द्वारा भोक्ता के रूप में वर्तमान सारे शरीर तुम्हारे अधिकार ebook converter DEMO Watermarks*