भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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विश्वाभिः पत्नीभिः सह ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१९) हम सच्ची प्रतिज्ञा वाले, सत्य अथवा यज्ञ की वृद्धि करने वाले सभी देवों की स्तुति करते हैं. वे अपनी पत्नियों के साथ यहां हमारे यज्ञ में आएं और हमें पाप से मुक्त करें. (१९) सर्वान् देवानिदं ब्रूमः सत्यसंधानृतावृधः. सर्वाभिः पत्नीभिः सह ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (२०) हम कहे गए और न कहे गए सच्ची प्रतिज्ञा वाले और यज्ञ अथवा सत्य की रक्षा करने वाले सभी देवों की स्तुति करते हैं. वे सभी अपनी पत्नियों के साथ आएं और हमें पाप से मुक्त करें. (२०) भूतं ब्रूमो भूतपतिं भूतानामुत यो वशी. भूतानि सर्वा संगत्य ते नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (२१) हम भूत की, भूतों के स्वामी की तथा भूतों को वश में करने वाले की स्तुति करते हैं. सभी भूत मिल कर हमें पाप से मुक्त करें. (२१) या देवीः पञ्च प्रदिशो ये देवा द्वादशर्तवः. संवत्सरस्य ये दंष्ट्रास्ते नः सन्तु सदा शिवाः.. (२२) पांच प्रधान दिशाओं की जो देवियां हैं तथा बारह मासों के स्वामी जो देव हैं और स्वतंत्र रूप प्रजापति की जो दाढ़ें अर्थात् पक्ष, सप्ताह आदि हैं, वे हमें पाप से मुक्त करें. (२२) यन्मातली रथक्रीतममृतं वेद भेषजम्. तदिन्द्रो अप्सु प्रावेशयत् तदापो दत्त भेषजम्.. (२३) इंद्र का सारथी मातलि रथ के बदले में खरीदी हुई मृत्यु का नाश करने वाली ओषधि को जानता है. इंद्र ने उस ओषधि को जल में डुबा दिया है. जल हमें वह ओषधि प्रदान करे. (२३) सूक्त-९ देवता—हवन से बचा भात उच्छिष्टे नाम रूपं चोच्छिष्टे लोक आहितः. उच्छिष्ट इन्द्रश्चाग्निश्च विश्वमन्तः समाहितम्.. (१) उच्छिष्ट अर्थात् होम के बाद बचे हुए भात में नाम और रूप वाला विश्व स्थित है. इस उच्छिष्ट में पृथ्वी आदि सभी लोक स्थित हैं. उच्छिष्ट ही इंद्र और अग्नि हैं. होम के बाद शेष बचे हुए इस भात में ईश्वर ने सारा जगत् स्थापित किया है. (१) ebook converter DEMO Watermarks*