अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 624, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तिष्ठत सं नह्यध्वं मित्रा देवजना यूयम्. संदृष्टा गुप्ता वः सन्तु या नो मित्राण्यर्बुदे.. (२) हे मित्रो अर्थात् हमारी विजय के प्रदानशील देवगणो! तुम सेना की इस छावनी से विजय प्राप्ति के लिए प्रार्थना करो. आप के द्वारा दिए हुए हमारे योद्धा आप के द्वारा रक्षित हैं. हे अर्बुद सर्प! हमारे जो मित्र हैं जो हमारे शत्रुओं के साथ युद्ध करने के लिए आए हैं, उन के तुम अंग बनो. (२) उत्तिष्ठतमा रभेथामादानसंदाननाभ्याम्. अमित्राणां सेना अभि धत्तमर्बुदे.. (३) हे अर्बुदि सर्प! तुम और निर्बुद इस स्थान से चले जाओ. तुम यहां से दूर जाओ. तथा युद्ध करो. तुम आदान और संदान नाम की रस्सियों से शत्रुओं की सेना को बांधो. (३) अर्बुदिर्नाम यो देव ईशानश्च न्यर्बुदिः. याभ्यामन्तरिक्षमावृतमियं च पृथिवी मही. ताभ्यामिन्द्रमेदिभ्यामहं जितमन्वेमि सेनया.. (४) अर्बुदि, ईशान और न्यर्बुदि नाम के जो देव है, उन के द्वारा आकाश और विशाल पृथ्वी को ढक लिया है. स्वर्ग और धरती को व्याप्त कर के स्थित एवं इंद्र के मित्र अर्बुदि और न्यर्बुदि के द्वारा जीती हुई सेना का मैं अनुगमन करूं. (४) उत्तिष्ठ त्वं देवजनार्बुदे सेनया सह. भञ्जन्नमित्राणां सेनां भोगेभिः परि वारय.. (५) हे देव जाति से संबंधित अर्बुदि नाम के सर्प! तुम अपनी सेना के साथ उठो. इस के बाद तुम शत्रुओं की सेनाओं का वध करते हुए अपने सर्प शरीरों के द्वारा उन की आंखें बंद कर लो. (५) सप्त जातान् न्यर्बुद उदाराणां समीक्ष्यन्. तेभिष्ट्वमाज्ये हुते सर्वैरुत्तिष्ठ सेनया.. (६) हे न्यर्बुदि नाम के सर्प! पहले बताए हुए आंखों को बंद करने वाले सब शरीरों के शत्रुओं को दिखाते हुए तुम घृत एवं आज्य के होने पर उन सब के द्वारा जाते हुए शत्रुओं को उन सब को दिखाओ जो उन की आंखों को बंद कर देते हैं. तुम उन सब के साथ हमारी सेना के संग उठो. (६) प्रतिघ्नानाश्रुमुखी क्रुधकर्णी च क्रोशतु. विकेशी पुरुषे हते रदिते अर्बुदे तव.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*