भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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गेहूं, जौ आदि फसलों, वन के वृक्षों गंधर्वों और अप्सराओं को दिखाओ. तुम उन्हें उल्कापात आदि अद्भुत अपशकुन दिखाओ. (२४) ईशां वो मरुतो देव आदित्यो ब्रह्मणस्पतिः. ईशां व इन्द्रश्चाग्निश्च धाता मित्रः प्रजापतिः. ईशां व ऋषयश्चक्रुरमित्रेषु समीक्षयन् रदिते अर्बुदे तव.. (२५) हे शत्रुओ! मरुत देव और ब्रह्मणस्पति तुम्हारे शिक्षक हों. इंद्र, अग्नि, धाता, मित्र और प्रजापति तुम्हारा नियंत्रण करने वाले हों. हे अर्बुदि नाम के सर्प! तुम्हारे द्वारा हमारे शत्रुओं को काटे जाने पर ऋषिगण उन्हें देखते हुए उन के शिक्षक बनें. (२५) तेषां सर्वेषामीशाना उत्तिष्ठ सं नह्यध्वं मित्रा देवजना यूयम्. इमं संग्रामं संजित्य यथालोकं वि तिष्ठध्वम्.. (२६) हमारे मित्र देवगण उन सभी शत्रुओं के शिक्षक होते हुए उठें. ये सभी उन की शिक्षा के लिए तैयार हो जाएं. हे शत्रुओ! देवगण इस संग्राम को जीत कर शत्रुओं का विनाश कर के अपने स्थान को जाएं. (२६) सूक्त-१२ देवता—त्रिषंधि उत्तिष्ठत सं नह्यध्वमुदाराः केतुभिः सह. सर्पा इतरजना रक्षांस्यमित्राननु धावत.. (१) हे उदार गुणों वाले सेनानायको! अपने झंडों के साथ उठो और युद्ध के लिए चलो. तुम कवच आदि पहन कर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ. हे सर्पों की आकृति वाले देवो! हे राक्षसो! तुम भी हमारे शत्रुओं के पीछे दौड़ो. (१) ईशां वो वेद राज्यं त्रिषन्धे अरुणैः केतुभिः सह. ये अन्तरिक्षे ये दिवि पृथिव्यां ये च मानवाः. त्रिषन्धेस्ते चेतसि दुर्णीमान उपासताम्.. (२) हे शत्रुओ! वज्र के अभिमानी देव त्रिषंधि तुम्हारा राज्य छीन कर अपने अधिकार में करें. हे वज्रात्मक देव! तुम्हारे जो लाल झंडे आकाश में उत्पात के रूप में उत्पन्न होते हैं तथा भूलोक में मनुष्य संबंधी हैं, तुम उन के साथ आओ. (२) अयोमुखाः सूचीमुखा अथो विकङ्कतीमुखाः. क्रव्यादो वातरंहस आ सजन्त्वमित्रान् वज्रेण त्रिषन्धिना.. (३) लोहे के समान मुख वाले, सूई के आकार के मुंह वाले, बहुत से कांटों जैसे पंखों वाले पक्षी, गिद्ध आदि मांस भक्षी पक्षी और हवा के समान तेजी से उड़ने वाले पक्षी, हमारे जिस ebook converter DEMO Watermarks*