अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 645, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे क्रव्याद अग्नि! हम पाप देवता निर्ऋति और मृत्यु को दूर करते हैं. हम अपने शत्रुओं को भी दूर करते हैं. जो हमारे शत्रु हैं, हम उन्हें तुम्हारी ओर भेजते हैं. तुम उन का भक्षण करो. (३) यद्यग्निः क्रव्याद् यदि वा व्याघ्र इमं गोष्ठं प्रविवेशान्योकाः. तं माषाज्यं कृत्वा प्र हिणोमि दूरं स गच्छत्वप्सुषदोऽप्यग्नीन्.. (४) यदि क्रव्याद अग्नि ने अथवा व्याघ्र ने हमारे गोष्ठ में प्रवेश किया है तो मैं उसे माष अर्थात् उरद आज्य द्वारा दूर करता हूं. (४) यत् त्वा क्रुद्धाः प्रचक्रुर्मन्युना पुरुषे मृते. सुकल्पमग्ने तत् त्वया पुनस्त्वोद्दीपयामसि.. (५) पुरुष की मृत्यु के कारण क्रोधित हुए प्राणियों ने तुम्हें प्रदीप्त किया. वह कार्य पूर्ण हो गया, इसीलिए हम ने तुम्हें तुम से ही प्रदीप्त किया है. (५) पुनस्त्वादित्या रुद्रा वसवः पुनर्ब्रह्मा वसुनीतिरग्ने. पुनस्त्वा ब्रह्मणस्पतिराधाद् दीर्घायुत्वाय शतशारदाय.. (६) हे अग्नि! वसु, ब्रह्मणस्पति, ब्रह्म, रुद्र, सूर्य और वसुनीति ने तुम्हें सौ वर्ष का जीवन प्राप्त करने के लिए पुनः प्रदीप्त किया था. (६) यो अग्निः क्रव्यात् प्रविवेश नो गृहमिमं पश्यन्नितरं जातवेदसम्. तं हरामि पितृयज्ञाय दूरं स घर्ममिन्धां परमे सधस्थे.. (७) अन्य अग्नियों को देखने के लिए यदि क्रव्याद अग्नि हमारे घर में प्रविष्ट हुआ है तो पितृयज्ञ करने के लिए मैं उसे दूर भगाता हूं. वह पाप नाश में स्थित हो धर्म को बढ़ाए. मैं क्रव्याद अग्नि को दूर भगाता हूं. वह पाप को साथ लेता हुआ यज्ञ के स्थान को प्राप्त हो. जातवेद अग्नि यहां प्रतिष्ठित हो कर देवों के लिए हवि वहन करे. (७) क्रव्यादमग्निं प्र हिणोमि दूरं यमराज्ञो गच्छतु रिप्रवाहः. इहायमितरो जातवेदा देवो देवेभ्यो हव्यं वहतु प्रजानन्.. (८) उक्थ के प्रशंसक क्रव्याद अग्नि को मैं पितृयान मार्ग से भेजता हूं. हे क्रव्याद! तू पितरों में ही प्रबुद्ध हो और वहीं जागता रह. देवयान मार्ग द्वारा तू यहां दुबारा मत आ. (८) क्रव्यादमग्निमिषितो हरामि जनान् दृहन्तं वज्रेण मृत्युम्. नि तं शास्मि गार्हपत्येन विद्वान् पितॄणां लोके अपि भागो अस्तु.. (९) मैं अपने मंत्र रूप वज्र से क्रव्याद अग्नि को दूर करता हूं. गार्हपत्य अग्नि के द्वारा मैं eBook converter DEMO Watermarks*