अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 677, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंय एवं विदुषो ब्राह्मणस्य क्षत्रियो गामादत्ते.. (८) ऊपर बताई गई दशा उस क्षत्रिय की होती है, जो विद्वान् की गौ का अपहरण करता है. (८) सूक्त-१० देवता—ब्रह्मगवी क्षिप्रं वै तस्याहनने गृध्राः कुर्वत ऐलबम्.. (१) जो क्षत्रिय ब्राह्मण की गाय को ले जाता है, गिद्ध उस के नेत्र निकालते हैं. (१) क्षिप्रं वै तस्यादहनं परि नृत्यन्ति केशिनीराघ्नानाः. पाणिनोरसि कुर्वाणाः पापमैलबम्.. (२) जो क्षत्रिय ब्राह्मण की गाय ले जाता है, उस की चिता भस्म के समीप केशों वाली स्त्रियां अपनी छाती कूटती हैं और आंसू बहाती हैं. (२) क्षिप्रं वै तस्य वास्तुषु वृकाः कुर्वत ऐलबम्.. (३) जो क्षत्रिय ब्राह्मण की गाय ले जाता है उस के घरों में शृगाल शीघ्र ही अपने नेत्र घुमाते हैं. (३) क्षिप्रं वै तस्य पृच्छन्ति यत् तदासी ३ दिदं नु ता ३ दिति.. (४) जो क्षत्रिय ब्राह्मण की गाय ले जाता है, उस के विषय में यह कहा जाने लगता है कि क्या यह उस का घर है. (४) छिन्ध्या च्छिन्धि प्र च्छिन्ध्यपि क्षापय क्षापय.. (५) हे ब्राह्मण की गाय! तू इस चुराने वाले का छेदन कर और उसे नष्ट कर डाल. (५) आददानमाङ्गिरसि ब्रह्मज्यमुप दासय.. (६) हे आंगिरस! तू अपहरणकर्ता क्षत्रिय का नाश कर दे. (६) वैश्वदेवी ह्यु १ च्यसे कृत्या कूल्बजमावृता.. (७) हे ब्राह्मण की गौ! तू मांस रूपी वज्र से अपने अपहरणकर्ता को नष्ट करने वाली है. (७) ओषन्ती समोषन्ती ब्रह्मणो वज्रः.. (८) हे ब्राह्मण की गाय! तू वज्र से ढकी हुई विश्व देवी कृत्या कही जाती है. (८) ebook converter DEMO Watermarks*