अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 682, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंरोहितो द्यावापृथिवी जजान तत्र तन्तुं परमेष्ठी ततान. तत्र शिश्रिये ऽ ज एकपादो ऽ दृंहद् द्यावापृथिवी बलेन.. (६) सूर्य ने आकाश और पृथ्वी को प्रकट किया. सूर्य ने उस में तंतु को बढ़ाया. एक पाद अज ने वहां आश्रय ले कर आकाश और पृथ्वी को बल से युक्त किया. (६) रोहितो द्यावापृथिवी अदृंहत् तेन स्व स्तभितं तेन नाकः. तेनान्तरिक्षं विमिता रजांसि तेन देवा अमृतमन्वविन्दन्.. (७) सूर्य ने आकाश और पृथ्वी को दृढ़ किया. उसी सूर्य ने दुःखों से रहित आकाश को स्थिर किया. उसी सूर्य ने अंतरिक्ष तथा वन्य सुख लोकों को बनाया. देवताओं ने उसी से अमृतत्व प्राप्त किया है. (७) वि रोहितो अमृशद् विश्वरूपं समाकुर्वाणः प्ररुहो रुहश्च. दिवं रुढ्वा महता महिम्ना सं ते राष्ट्रमनक्तु पयसा घृतेन.. (८) रूह और प्ररूह अर्थात् उगने वाले लता वृक्ष आदि को भलीभांति प्रकट करने वाले सूर्य ने सब शरीरों का स्पर्श किया. हे यजमान! वे सूर्य अपने महत्त्व से तेरे राष्ट्र को घृत और दूध से संपन्न करें. (८) यास्ते रुहः प्ररुहो यास्त आरुहो याभिरापृणासि दिवमन्तरिक्षम्. तासां ब्रह्मणा पयसा वावृधानो विशि राष्ट्रे जागृहि रोहितस्य.. (९) हे मनुष्यो! तुम्हारी जो रोहण, प्ररोहण और आरोहण करने वाली फसलें, लताएं आदि हैं, जिन के द्वारा तुम अंतरिक्ष के प्राणियों का भरणपोषण करते हो, उस के दूध के समान सारयुक्त कर्म के द्वारा मित्र बाल और वृद्धि को प्राप्त होते हुए तुम सूर्य के राष्ट्र में सचेत रहो. (९) यास्ते विशस्तपसः संबभूवुर्वत्सं गायत्रीमनु ता इहागुः. तास्त्वा विशन्तु मनसा शिवेन संमाता वत्सो अभ्येतु रोहितः.. (१०) जो प्रजाएं तपोबल से प्रकट हुई हैं, जो गायत्री रूप वत्सों के साथ यहां आई हैं, वे कल्याण करने वाले चित्त से तुम में रमें. इन का वत्स सूर्य तुम्हारे पास आए. (१०) ऊर्ध्वो रोहितो अधि नाके अस्थाद् विश्वा रूपाणि जनयन् युवा कविः. तिग्मेनाग्निर्ज्योतिषा वि भाति तृतीये चक्रे रजसि प्रियाणि.. (११) जब वे सूर्य ऊंचे हो कर स्वर्ग में प्रतिष्ठित होते हैं, तब वे सब रूपों को प्रकट करते हैं. उन सूर्य की ही तीक्ष्ण ज्योति से अग्नि ज्योति वाली है. वे तृतीय लोक अर्थात् द्युलोक में इच्छित फलों को प्रकट करते हैं. (११) ebook converter DEMO Watermarks*