अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 708, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंस यज्ञस्तस्य यज्ञः स यज्ञस्य शिरस्कृतम्.. (१२) यज्ञ उन का है और वे यज्ञ के हैं एवं यज्ञ के शीर्ष रूप हैं. (१२) स स्तनयति स वि द्योतते स उ अश्मानमस्यति.. (१३) वे ही दमकते और कड़कते हैं वे ही उपल गिराते है. (१३) पापाय वा भद्राय वा पुरुषायसुराय वा.. (१४) तुम पापियों को, कल्याणकारी पुरुष को, असुर को और ओषधियों को उत्पन्न करते हो. (१४) यद्वा कृणोष्वोषधीर्यद्वा वर्षसि भद्रया यद्वा जन्यमवीवृधः.. (१५) कल्याणमयी वृष्टि के रूप में तुम रसते हो तथा उत्पन्न हुओं को बढ़ाते हो. (१५) तावांस्ते मघवन् महिमोपो ते तन्वः शतम्.. (१६) तुम मघवन अर्थात् इंद्र हो. तुम सैकड़ों देवों से युक्त हो और महिमा के द्वारा महान हो. (१६) उपो ते बध्वे बद्धानि यदि वासि न्यर्बुदम्.. (१७) तुम सैकड़ों बांधे हुओं के बांधने वाले और अंत रहित हो. (१७) सूक्त-८ देवता—अध्यात्म रोहित भूयानिन्द्रो नमुराद् भूयानिन्द्रासि मृत्युभ्यः.. (१) वे इंद्र नमुर से श्रेष्ठ हैं. हे इंद्र! तुम मृत्यु के कारणों से भी उत्कृष्ट हो. (१) भूयानरात्याः शच्याः पतिस्त्वमिन्द्रासि विभूः प्रभूरिति त्वोपास्महे वयम्.. (२) हे इंद्र! तुम शत्रुओं की अपेक्षा महान हो. तुम शक्ति के पति हो, तुम व्यापक और स्वामी हो. इस प्रकार के तुम्हारी हम उपासना करते हैं. (२) नमस्ते अस्तु पश्यत पश्य मा पश्यत.. (३) हे दर्शनीय! तुम्हारे लिए नमस्कार है. हे शोभन! तुम मुझे देखो. (३) ebook converter DEMO Watermarks*