भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 727, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 727

अगन्त्स देवः परमं सधस्थमगन्म यत्र प्रतिरन्त आयुः.. (३६) हम लोग धन के साथ उत्तम मन वाले हैं. हम यहां रहते हुए गंधर्वों को घेरें. वे हमारा नमस्कार स्वीकार करें. हम उन की कृपा प्राप्त करें. वह देव उस परम श्रेष्ठ स्थान को प्राप्त हुआ है, जहां अपनी आयु को दीर्घ बनाते हुए हम भी पहुंचते हैं. (३६) सं पितरावृत्विये सृजेथां माता पिता च रेतसो भवाथः. मर्य इव योषामधिरोहयैनां प्रजां कृण्वाथामिह पुष्यतं रयिम्.. (३७) तुम दोनों ऋतुकाल में मातापिता बनने के लिए संयुक्त होओ. वीर्य के योग से तुम माता और पिता बनो. हे पति! मानवोचित निर्णय से पलंग पर चढ़ो. इस प्रकार तुम संतान को जन्म दो तथा अपने धन की वृद्धि करो. (३७) तां पूषञ्छिवतमामेरयस्व यस्यां बीजं मनुष्या ३ वपन्ति. या न ऊरू उशती विश्रयाति यस्यामुशन्तः प्रहरेम शेपः.. (३८) हे पूषा देव! तुम उस कल्याणमयी स्त्री को प्राप्त करो, जिस में बीज बोया जाता है. जो इच्छा करती हुई हमें अपना शरीर समर्पित करती है, हम उस के साथ इंद्रिय सुख प्राप्त करें. (३८) आ रोहोरुम उप धत्स्व हस्तं परि ष्वजस्व जायां सुमनस्यमानः. प्रजां कृण्वाथामिह मोदमानौ दीर्घं वामायुः सविता कृणोतु.. (३९) हे पति! तू अपनी पत्नी को स्पर्श कर. प्रसन्न होते हुए तुम दोनों संतान को उत्पन्न करो. सविता देव तुम्हारी आयु में वृद्धि करें. (३९) आ वां प्रजां जनयतु प्रजापतिरहोरत्राभ्यां समनक्त्वर्यमा. अदुर्मङ्गली पतिलोकमा विशेमं शं नो भव द्विपदे शं चतुष्पदे.. (४०) प्रजापति तुम दोनों की संतान को जन्म दें. अर्यमादेव तुम दोनों को रातदिन संयुक्त करें. हे वधू! तू अमंगलों से अलग रहती हुई इस घर में प्रवेश कर और दो पैरों वाले मनुष्यों तथा चार पैरों वाले पशुओं को सुख देने वाली बन. (४०) देवैर्दत्तं मनुना साकमेतद् वाधुयं वासो वध्वश्च वस्त्रम्. यो ब्रह्मणे चिकितुषे ददाति स इद् रक्षांसि तल्पानि हन्ति. (४१) मनु के साथसाथ देवों द्वारा दिया हुआ विवाह के समय का यह वस्त्र वधू का वस्त्र है. यह निश्चित रूपसे पलंग पर रहने वाले राक्षसों का विनाश करता है. (४१) यं मे दत्तो ब्रह्मभागं वधूयोर्वाधूयं वासो वध्वश्च वस्त्रम्. eBook converter DEMO Watermarks*