भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 74, कुल 1063 में से

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ताभ्यो गन्धर्वपत्नीभ्यो ऽ प्सराभ्यो ऽ करं नमः.. (५) जो किरणें मनुष्य को रुलाने वाली, शक्ति संपन्न, इंद्रियों को निष्क्रिय करने की इच्छुक एवं मन को मोहने वाली हैं, उन गंधर्व पत्नी अप्सराओं को मैं नमस्कार करता हूं. (५) सूक्त-३ देवता—स्राव-विरोधी ओषधि अदो यदवधावत्यवत्कमधि पर्वतात्. तत् ते कृणोमि भेषजं सुभेषजं यथाससि.. (१) मुंजवान पर्वत से उतर कर जो मूंज धरती पर वर्तमान है, हे मूंज! तेरे उस अग्रभाग से मैं ओषधि बनाता हूं, क्योंकि तू उत्तम जड़ीबूटी है. (१) आदङ्गा कुविदङ्गा शतं या भेषजानि ते. तेषामसि त्वमुत्तममनास्रावमरोगणम्.. (२) हे ओषधि! प्रयोग के तुरंत बाद रोग समाप्त करो एवं बहुत से रोगों का विनाश करो. तुम से संबंधित अनगिनत जड़ीबूटियां हैं, उन में तुम उत्तम हो. तुम अतिसार आदि रोग दूर करने वाली एवं इन के मूल कारणों का विनाश करने वाली हो. (२) नीचैः खनन्त्यसुरा अरुस्राणमिदं महत्. तदास्रावस्य भेषजं तदु रोगमनीनशत्.. (३) प्राणों का अपहरण करने वाले राक्षस एवं शरीर को निर्बल बनाने वाले रोग विशाल घाव के पकने के स्थान को नीचे से विदीर्ण करते हैं, यह महती ओषधि उस का समूल विनाश करती है तथा अतिसार आदि रोगों को जड़ से मिटा देती है. (३) उपजीका उद्भरन्ति समुद्रादधि भेषजम्. तदास्रावस्य भेषजं तदु रोगमशीशमत्.. (४) बांमी बनाने वाली दीमक पृथ्वी के नीचे स्थित जलराशि से रोग निवारक जड़ीबूटी को उखाड़ती है. वह अतिसार आदि रोगों की ओषधि है और उन्हें शांत करने वाली है. (४) अरुस्राणमिदं महत् पृथिव्या अध्युद्भृतम्. तदास्रावस्य भेषजं तदु रोगमनीनशत्.. (५) घाव को पकाने वाली यह जड़ीबूटी अर्थात् मिट्टी खेत से खोद कर लाई गई है. यह अतिसार रोगों की ओषधि है और उन्हें शांत करती है. (५) शं नो भवन्त्वप ओषधयः शिवाः. ebook converter DEMO Watermarks*