भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 754, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 754

जब वह उत्तर दिशा की ओर चला, तब वह सप्तर्षियों द्वारा दी गई आहुति को अन्नाद बना कर तथा सोम हो कर चला. (७) आहुत्यान्नाद्यान्नमत्ति य एवं वेद.. (८) इस बात को जानने वाला अन्नाद आहुति से अन्न का भक्षण करता है. (८) स यद् ध्रुवां दिशमनु व्यचलद् विष्णुर्भूत्वानुव्यचलद् विराजमन्नादीं कृत्वा.. (९) जब वह ध्रुव दिशा की ओर चला, तब विराट् को अन्नाद बता कर स्वयं विष्णु रूप में चला. (९) विराजान्नाद्यान्नमत्ति य एवं वेद.. (१०) इस बात को जानने वाला अन्नाद विराट के द्वारा अन्न का भक्षण करता है. (१०) स यत् पशूननु व्यचलद् रुद्रो भूत्वानुव्य चलदोषधीरन्नादीः कृत्वा.. (११) जब वह पशुओं की ओर चला तब ओषधियों को अन्नाद बनाते हुए उस ने रुद्र के रूप में गमन किया. (११) ओषधीभिरन्नादीभिरन्नमत्ति य एवं वेद.. (१२) इस बात को जानने वाला अन्नाद ओषधियों से अन्न को खाता है. (१२) स यत् पितॄननु व्यचलद् यमो राजा भूत्वानुव्य चलत् स्वधाकारमन्नादं कृत्वा.. (१३) जब वह पितरों की ओर चला, तब उस ने स्वधा को अन्नाद बनाया और वह हो स्वयं यमराजा बन कर चला. (१३) स्वधाकरेणान्नादेनान्नमत्ति य एवं वेद.. (१४) इस बात को जानने वाला स्वधाकार अन्नाद से अन्न को खाता है. (१४) यन्मनुष्या ३ ननु व्यचलदग्निर्भूत्वानुव्य चलत् स्वाहाकारमन्नादं कृत्वा.. (१५) जब वह मनुष्यों की ओर चला, तब स्वाहा को अन्नाद बना कर अग्नि होता हुआ चला. (१५) ebook converter DEMO Watermarks*