भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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श्रेष्ठ उषा मरण धर्मा मनुष्यों में अमृत से युक्त है तथा सुंदरता के साथ प्रतिष्ठित होती है. (२) मा मां प्राणो हासीन्मो अपानो ऽ वहाय परा गात्.. (३) प्राण वायु मेरा त्याग न करे. अपान वायु भी मुझे छोड़ कर न जाए. (३) सूर्यो माह्नः पात्वग्निः पृथिव्या वायुरन्तरिक्षाद् यमो मनुष्येभ्यः सरस्वती पार्थिवेभ्यः.. (४) सूर्य दिन में मेरी रक्षा करें. अग्नि पृथ्वी पर मेरी रक्षा करे. वायु अंतरिक्ष में, यम मनुष्यों से तथा सरस्वती पार्थिव पदार्थों से मेरी रक्षा करने वाली हैं. (४) प्राणापानौ मा मा हासिष्टं मा जने प्र मेषि.. (५) प्राण और अपान वायु मेरा त्याग न करें. मैं सदा प्रसन्न रहूं. (५) स्वस्त्य १ द्योषसो दोषसश्च सर्व आपः सर्वगणो अशीय. (६) उषा काल और रात्रि के द्वारा मंगल हो. मैं सभी गणों और जलों का उपयोग करने वाला बनूं. (६) शक्वरी स्थ पशवो मोप स्थेषुर्मित्रावरुणौ मे प्राणापानावग्निर्मे दक्षं दधातु.. (७) हे पशुओ! तुम भुजाओं वाले बनो तथा मेरे पास स्थित रहो. वरुण देव मेरी प्राण और अपान वायु को पोषित करें. अग्नि देव मेरे बल को दृढ़ करें. (७) सूक्त-५ देवता—दुःस्वप्ननाशन विद्म ते स्वप्न जनित्रं ग्राह्याः पुत्रो ऽ सि यमस्य करणः.. (१) हे स्वप्न! तू ग्राह्य पिशाचों से उत्पन्न हुआ है तथा यम को प्राप्त करने वाला है. मैं तेरी उत्पत्ति जानता हूं. (१) अन्तको ऽ सि मृत्युरसि.. (२) हे स्वप्न! तू जीवन का अंत करने वाली मृत्यु है. (२) तं त्वा स्वप्न तथा सं विद्म स नः स्वप्न दुष्षप्न्यात् पाहि.. (३) eBook converter DEMO Watermarks*