अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 765, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे स्वप्न! तुम जीवन का अंत करने वाली मृत्यु हो. (९) तं त्वा स्वप्न तथा सं विद्म स नः स्वप्न दुष्ष्वप्न्यात् पाहि.. (१०) हे स्वप्न! मैं तुम्हें भलीभांति जानता हूं. तुम मुझे बुरे स्वप्नों से बचाओ. (१०) सूक्त-६ देवता—दुःस्वप्ननाशन अजैष्माद्यासनामाग्याभूमानागसो वयम्.. (१) हम आज विजय प्राप्त करें. हम आज खाद्य पदार्थ प्राप्त करें. आज हम पाप रहित हो जाएं. (१) उषो यस्माद् दुष्ष्वप्न्याद्भैष्माप तदुच्छतु.. (२) हे उषा देवी! जिस बुरे स्वप्न से हम डरते हैं, वह बुरा स्वप्न समाप्त हो जाए. (२) द्विषते तत् परा वह शपते तत् परा वह.. (३) हे देव! आप उसे भय को प्राप्त कराएं जो हमसे द्वेष करता है तथा हमारी निन्दा करता है. (३) यं द्विष्मो यश्च नो द्वेष्टि तस्मा एनद् गमयामः.. (४) हम जिससे द्वेष करते हैं और जो हमसे द्वेष करता है, हम इस भय को उस के पास भेजते हैं. (४) उषा देवी वाचा संविदाना वाग् देव्यु १ षसा संविदाना.. (५) उषा देवी वाणी के साथ और वाणी की देवी उषा के साथ एकमत स्थापित करें. (५) उषस्पतिर्वाचस्पतिना संविदानो वाचस्पतिरुषस्पतिना संविदानः.. (६) उषा के पति वाचस्पति अर्थात् वाणी के स्वामी के साथ तथा वाचस्पति उषा देवी के पति के साथ एकमत स्थापित करें. (६) ते ३ मुष्मै परा वहन्त्वरायान् दुर्नाम्नः सदान्वाः.. (७) कुम्भीका दूषीकाः पीयकान्.. (८) वे इस दुष्ट शत्रु के लिए दूषित नाम वाले दुःखों को, आपत्तियों को घड़े के समान बढ़ने वाले उदर रोगों को, शरीर के दूषित रोगों को तथा प्राणघातक रोगों को प्राप्त कराएं. (७-८) ebook converter DEMO Watermarks*