अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 796, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंअपेत वीत वि च सर्पतातो ऽ स्मा एतं पितरो लोकमक्रन्. अहोभिरद्भिरक्तुभिर्व्यक्तं यमो ददात्यवसानमस्मै.. (५५) हे राक्षसो! तुम इस स्थान से भागो. तुम चाहे यहां पर पहले से रहते हो अथवा नए आकर रहने लगे हो, तुम यहां से चले जाओ, क्योंकि यह स्थान इस प्रेत के लिए दिन, रात और जल के सहित रहने के लिए यम ने प्रदान कियाहै. (५५) उशन्तस्त्वेधीमहुशन्तः समिधीमहि. उशन्नुशत आ वह पितॄन् हविषे अत्तवे.. (५६) हे अग्नि! इस पितृ यज्ञ को संपन्न करने के लिए हम तुम्हारी कामना करते हैं तथा तुम्हारा आह्वान करते हैं. तुम भलीभांति प्रदीप्त हो कर स्वधन की इच्छा करने वाले पितरों को लिए हवि भक्षण करने आओ. (५६) द्युमन्तस्त्वेधीमहि द्युमन्तः समिधीमहि. द्युमान् द्युमत आ वह पितॄन् हविषे अत्तवे.. (५७) हे अग्नि! हम तुम्हारा आह्वान करते हैं. तुम्हारी कृपा से हम यशस्वी हो गए हैं. हम तुम्हें प्रदीप्त करते हैं. तुम हमारी हवि स्वीकार कर के उसे भक्षण करने के लिए पितरों के यहां ले आओ. (५७) अङ्गिरसो नः पितरो नवग्वा अथर्वाणो भृगवः सोम्यासः. तेषां वयं सुमतौ यज्ञियानामपि भद्रे सौमनसे स्याम.. (५८) प्राचीन अंगिरा ऋषि हमारे पितर हैं. नवीन स्तोक वाले अथर्वा तथा भृगु हमारे पितर हैं. ये सब सोमरस का पान करने वाले हैं. हम उन की कृपा दृष्टि में रहें. वे हम से प्रसन्न रहें. (५८) अङ्गिरोभिर्यज्ञियेरा गहीह यम वैरूपैरिह मादयस्व. विवस्वन्तं हुवे यः पिता ते ऽ स्मिन् बर्हिष्या निषद्य.. (५९) हे यम! अंगिरा नाम के यज्ञ संबंधी पितरों के साथ यहां आ कर तृप्त बनो. मैं तुम को ही नहीं, तुम्हारे पिता सूर्य को भी बुलाता हूं, जिस से वे इस कुश के आसन पर बैठ कर हवि ग्रहण करें. मैं इस प्रकार तुम्हें आहूत करता हूं. (५९) इमं यम प्रस्तरमा हि रोहाङ्गिरोभिः पितृभिः संविदानः. आ त्वा मन्त्राः कविशस्ता वहन्त्वेना राजन् हविषो मादयस्व.. (६०) हे यम! तुम अंगिरा नाम वाले पितरों के समान मति वाले बन कर कुश के इस आसन पर बैठो. महर्षियों के मंत्र तुम्हें बुलाने में समर्थ हों. तुम हवि प्राप्त कर के प्रसन्न बनो. (६०) ebook converter DEMO Watermarks*