अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 803, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंलिए यहां आओ. (३४) ये अग्निदग्धा ये अनग्निदग्धा मध्ये दिवः स्वधया मादयन्ते. त्वं तान् वेत्थ यदि ते जातवेदः स्वधया यज्ञं स्वधितिं जुषन्ताम्.. (३५) जो पितर अग्नि के द्वारा संस्कृत हुए, जो गाड़ने आदि के द्वारा संस्कृत हुए और जो पिंड, पितृयाग आदि से तृप्त हुए आकाश में निवास करते हैं, हे अग्नि! तुम उन्हें भलीभांति जानते हो. वे अपनी संतानों के द्वारा किए जाने वाले पितृयाग आदि का सेवन करें. (३५) शं तप माति तपो अग्ने मा तन्वं १ तपः. वनेषु शुष्मो अस्तु ते पृथिव्यामस्तु यद्धरः.. (३६) हे अग्नि! इस प्रेत के शरीर को अधिक मत जलाओ. जिस प्रकार इसे सुख मिले, वैसा करो. शोषण करने वाली तुम्हारी ज्वालाएं जंगल में जाएं तथा रस का हरण करने वाला तेज पृथ्वी में रहे. तुम हमारे शरीरों को भस्म मत करो. (३६) ददाम्यस्मा अवसानमेतद् य एष आगन् मम चेहभूदिह. यमश्चिकित्वान् प्रत्येतदाह ममैष राय उप तिष्ठतामिह.. (३७) यम का वचन—यह आया हुआ पुरुष मेरा हो तो मैं उसे स्थान दूं. अब यह मेरे पास आया है. यदि यह मेरा स्तवन करता रहे तो यहां रह सकता है. (३७) इमां मात्रां मिमीमहे यथापरं न मासातै. शते शरत्सु नो पुरा.. (३८) हम इस श्मशान को नापते हैं, क्योंकि ब्रह्मा ने हमें सौ वर्ष की आयु प्रदान की है. इसलिए बीच में ही श्मशान हमें अपने कर्म के द्वारा प्राप्त न हो. (३८) प्रेमां मात्रां मिमीमहे यथापरं न मासातै. शते शरत्सु नो पुरा.. (३९) हम इस श्मशान को अच्छी प्रकार नापते हैं, जिस से हमें सौ वर्ष से पहले बीच में ही श्मशान कर्म प्राप्त न हो. (३९) अपेमां मात्रां मिमीमहे यथापरं न मासातै. शते शरत्सु नो पुरा.. (४०) हम इस श्मशान के नाप संबंधी दोषों को हटाते हुए नापते हैं, जिस से हमें सौ से पहले बीच में ही दूसरा मृतक कर्म प्राप्त न हो. (४०) वी ३ मां मात्रां मिमीमहे यथापरं न मासातै. शते शरत्सु नो पुरा.. (४१) ebook converter DEMO Watermarks*