भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 812, कुल 1063 में से

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लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२८) सभी देवों के साथ सोम उत्तर दिशा में स्थित राक्षस आदि से मेरी रक्षा करें. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग में मार्ग का प्रवर्तन करने वालों की हम हवि के द्वारा पूजा करते हैं. हे देवगण! इस यज्ञ में तुम भाग प्राप्त करने वाले बनो. (२८) धर्ता ह त्वा धरुणो धारयाता ऊर्ध्वं भानुं सविता द्यामिवोपरि. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (२९) हे प्रेत! संपूर्ण जगत् को धारण करने वाले तथा ऊपर की दिशा का स्वामी धाता देव ऊपर के लोक को जाने के लिए इच्छुक तेरी उसी प्रकार रक्षा करें, जिस प्रकार सब के प्रेरक सूर्य दीप्त आकाश को धारण करते हैं. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग के मार्ग का प्रवर्तन करने वालों को हम हवि के द्वारा पूजते हैं. हे देवगण! तुम हमारे इस यज्ञ में भाग प्राप्त करने वाले बनो. (२९) प्राच्यां त्वा दिशि पुरा संवृतः स्वधायामा दधामि बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (३०) हे प्रेत! दहन के स्थान से पूर्व दिशा में कंबल से लिपटा हुआ मैं शरीर वाला रहा हूं, उस दिशा में मैं तुझे पितरों की तृप्ति करने वाली स्वधा नाम की देवी पर स्थापित करता हूं. दाताओं द्वारा ब्राह्मणों को दान की गई पृथ्वी जिस प्रकार ऊपर की दिशा में स्थित स्वर्ग का पालन करती है, हम हवि के द्वारा तुम्हारा स्वागत करते हैं. हे देवगण! तुम इस यज्ञ में भाग लेने वाले बनो. (३०) दक्षिणायां त्वा दिशि पुरा संवृतः स्वधायामा दधामि बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (३१) हे प्रेत! हम दहन के स्थान से दक्षिण दिशा में पहले से स्थित तथा कंबल से ढकी हुई स्वधा नाम की पितृ देवता में तुझे स्थापित करते हैं. दाताओं द्वारा ब्राह्मणों को दान की गई पृथ्वी जिस प्रकार ऊपर की दिशा में स्वर्ग का पालन करती है, उसी प्रकार स्वधा नाम की पितृ देवता तुम्हारा पालन करें. पुण्य के फल के रूप में स्वर्ग के मार्ग का प्रवर्तन करने वालों की पूजा हम हवि द्वारा करते हैं. हे देवगण! तुम इस यज्ञ में भाग लेने वाले बनो. (३१) प्रतीच्यां त्वा दिशि पुरा संवृतः स्वधायामा दधामि बाहुच्युता पृथिवी द्यामिवोपरि. लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ.. (३२) ebook converter DEMO Watermarks*