भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 842, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 842

सप्तास्यासन् परिधयस्त्रिः सप्त समिधः कृताः. देवा यद् यज्ञं तन्वाना अबध्नन् पुरुषं पशुम्.. (१५) अश्वमेध अथवा पुरुष मेध यज्ञ करते हुए देवों ने अपने यज्ञ में अश्व रूप पुरुष को यूप अर्थात् लकड़ी के खंभे से बांधा. देवों ने गायत्री आदि सात छंदों को परिधि बनाया तथा इक्कीस समिधाओं की रचना की. (१५) मूर्ध्नो देवस्य बृहतो अंशवः सप्त सप्ततीः. राज्ञः सोमस्याजायन्त जातस्य पुरुषादधि.. (१६) उस यज्ञ रूप पुरुष के मस्तक से सोम राजा की चार सौ नब्बे महान शोभा वाली रश्मियां उत्पन्न हुईं. (१६) सूक्त-७ देवता—नक्षत्र चित्राणि साकं दिवि रोचनानि सरीसृपाणि भुवने जवनि. तुर्मिशं सुमतिमिच्छमानो अहानि गीर्भिः सपर्यामि नाकम्.. (१) अनेक रूपों वाले जो प्रकाश युक्त नक्षत्र आकाश में चमकते हैं, वे प्रतिक्षण द्रुत गति से सरकने वाले हैं. मैं उन नक्षत्रों की मंत्र रूप वाली स्तुति करता हूं, क्योंकि मैं उन की बाधा निवारण करने वाली कल्याणमयी बुद्धि की इच्छा करता हूं. (१) सुहवमग्ने कृत्तिका रोहिणी चास्तु भद्रं मृगशिरः शमार्द्रा. पुनर्वसू सूनृता चारु पुष्यो भानुराश्लेषा अयनं मघा मे.. (२) हे अग्नि! कृत्तिका नक्षत्र हमारे आह्वान के अनुकूल हो. हे प्रजापति! रोहिणी नक्षत्र हमारे सुंदर आह्वान के योग्य हो. हे सोम! मृगशिरा नक्षत्र हमारे लिए मंगलदायक तथा आह्वान के योग्य हो. हे रुद्र! आर्द्रा नक्षत्र हमारे लिए सुखकारी हो. हे अदिति! पुनर्वसु नक्षत्र हमें सत्य वाणी देने वाला हो. बृहस्पति संबंधी पुष्य नक्षत्र हमारे लिए श्रेय देने वाला हो. सर्प देवता वाला आश्लेषा नक्षत्र हमें दीप्ति प्रदान करे. पितृ देवता वाला मघा नक्षत्र मेरा गंतव्य स्थान हो. (२) पुण्यं पूर्वा फल्गुन्यौ चात्र हस्तश्चित्रा शिवा स्वाति सुखो मे अस्तु. राधे विशाखे सुहवानुराधा ज्येष्ठा सुनक्षत्रमरिष्ट मूलम्.. (३) अर्यमा देव का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, भग देव का उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र, सविता देव का हस्त नक्षत्र तथा इंद्र देव का चित्रा नक्षत्र मुझे पुण्य से भरा हुआ सुख दे. वायु देव का स्वाति नक्षत्र, इंद्र देवता वाला राधा अथवा विशाखा नक्षत्र और मित्र देव का अनुराधा नक्षत्र हमारे लिए सुख से आह्वान योग्य हो. इंद्र देव का ज्येष्ठा नक्षत्र हमें सुखी बनाए. पितर देवों का ebook converter DEMO Watermarks*