भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 848, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 848

शं नः सुकृतां सुकृतानि सन्तु शं न इषिरो अभि वातु वातः.. (४) जिस के मुख में ज्योति है, ऐसी अग्नि हमें सुख देने वाले हों. मित्र, वरुण और अश्विनीकुमार हमारे सुख के कारण बनें. पुण्य कर्म करने वालों के उत्तम कर्म हमें सुख प्रदान करें. गमनशील वायु हमारे सुख के उद्देश्य से चले. (४) शं नो द्यावापृथिवी पूर्वहूतौ शमन्तरिक्षं दृशये नो अस्तु. शं न ओषधीर्वनिणो भवन्तु शं नो रजसस्पतिरस्तु जिष्णुः.. (५) देवों के द्वारा सब से पहले स्तुति किए गए द्यावा और पृथ्वी हमारा कल्याण करने वाले हों. अंतरिक्ष अर्थात् मध्यम लोक हमारी दृष्टि को सुख देने वाला हो. ओषधियां अर्थात् जड़ीबूटियां तथा वनों के वृक्ष हमारा कल्याण करें. लोकों के पालनकर्ता एवं जयशील इंद्र हमें सुख प्रदान करें. (५) शं न इन्द्रो वसुभिर्देवो अस्तु शमादित्येभिर्वरुणः सुशंसः. शं नो रुद्रो रुद्रेभिर्जलाषः शं नस्त्वष्टा ग्नाभिरिह शृणोतु.. (६) वसु नाम के देवों के साथ इंद्र हमें सुख प्रदान करें. शोभन स्तुतियों वाले वरुण आदित्य देवों के साथ हमारा कल्याण करें. सुखकारी रुद्र रुद्रों के साथ हमें सुख दें. त्वष्टा देव सभी देव पत्नियों के साथ इस यज्ञ में हमें सुख प्रदान करने वाले बनें. (६) शं नः सोमो भवतु ब्रह्म शं नः शं नो ग्रावाणः शमु सन्तु यज्ञाः. शं नः स्वरूणां मितयो भवन्तु शं नः प्रस्व १: शम्वस्तु वेदिः.. (७) निचोड़े गए सोम, स्तोत्रों तथा शंसों वाले मंत्र, सोमलता कुचलने के साधन पत्थर तथा यज्ञ हमारा कल्याण करें. यूपों के समूह हमें सुख दें. चरु और पुरोडाश बनाने में काम आने वाली तथा अधिकता से उत्पन्न होने वाली ओषधियां अर्थात् जड़ीबूटियां हमारा कल्याण करें. यज्ञ की वेदी हमें सुख प्रदान करे. (७) शं नः सूर्य उरुचक्षा उदेतु शं नो भवन्तु प्रदिशश्चतस्रः. शं नः पर्वता ध्रुवयो भवन्तु शं नः स्सिन्धवः शमु सन्त्वापः.. (८) फैले हुए तेज वाले सूर्य हमें सुख देने के लिए उदय हों. चारों दिशाएं, स्थिर रहने वाले पर्वत, नदियां और जल हमारा कल्याण करने वाले हों. (८) शं नो अदितिर्भवतु व्रतेभिः शं नो भवन्तु मरुतः स्वर्काः. शं नो विष्णुः शमु पूषा नो अस्तु शं नो भवित्रं शम्वस्तु वायुः.. (९) देवमाता अदिति व्रतों के साथ हमें सुख देने वाली हों. उत्तम स्तुतियों वाले मरुत् हमारा कल्याण करें. विष्णु, पूषा, अंतरिक्ष अथवा जल हमें सुख देने वाले हों. वायु हमारा कल्याण ebook converter DEMO Watermarks*