अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 875, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूक्त-३० देवता—दर्भमणि यत् ते दर्भ जरामृत्युः शतं वर्मसु वर्म ते. तेनेमं वर्मिणं कृत्वा सपत्नाञ्जहि वीर्यैः.. (१) हे दर्भ! तेरी गांठों में सैकड़ों वृद्धावस्थाएं और मृत्यु व्याप्त हैं. तेरे पास वृद्धावस्था और मृत्यु से बचाने वाला कवच है. उस कवच से रक्षा, जय आदि की कामना करने वाले पुरुष को सुरक्षित कर के अपनी शक्तियों से इस राजा के शत्रुओं को मारो. (१) शतं ते दर्भ वर्मणि सहस्रं वीर्याणि ते. तमस्मै विश्वे त्वां देवा जरसे भर्त्वा अदुः.. (२) हे दर्भमणि! तुम्हारी गांठों में सैकड़ों सुरक्षा कवच और शक्तियां विद्यमान हैं. सभी देवों से रक्षा की कामना करने वाले इस राजा को वृद्धावस्था दूर करने के लिए तुम्हें दिया है. (२) त्वामाहुर्देववर्म त्वां दर्भ ब्रह्मणस्पतिम्. त्वामिन्द्रस्याहुर्वर्म त्वं राष्ट्राणि रक्षसि.. (३) हे दर्भमणि! तुम्हें देवों का कवच और वेदों का रक्षक कहा गया है. तुम्हें इंद्रक कवच बताया गया है. तुम राष्ट्रों की रक्षा करते हो. (३) सपत्नाक्षयणं दर्भ द्विषतस्तपनं हृदः. मणिं क्षत्रस्य वर्धनं तनूपानं कृणोमि ते.. (४) हे दर्भमणि! तुम शत्रुओं का विनाश करने वाले तथा द्वेष करने वालों के हृदय को संतप्त करने वाले हो. हे राजन्! मैं दर्भमणि को तुम्हारा रक्षक एवं शक्ति बढ़ाने वाला बनाता हूं. (४) यत् समुद्रो अभ्यक्रन्दत् पर्जन्यो विद्युता सह. ततो हिरण्ययो बिन्दुस्ततो दर्भो अजायत.. (५) जिस मेघ से जल बरसता है, उस से बिजली की गड़गड़ाहट के साथ हिरण्यमय बूंद प्रकट हुई, उन्हीं से दर्भ उत्पन्न हुआ है. (५) सूक्त-३१ देवता—औदुंबरमणि औदुम्बरेण मणिना पुष्टिकाम्याय वेधसा. पशूनां सर्वेषां स्फातिं गोष्ठे मे सविता करत्.. (१) विधाता ने पशु, पुत्र, धन, शरीर आदि की कामना करने वाले पुरुष के लिए प्राचीन ebook converter DEMO Watermarks*