भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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पृष्ठ 877

के द्वारा प्रेरित उदुंबर मणि विशेष तेज के साथ मेरे समीप आए. (७) देवो मणिः सपत्नहा धनसा धनसातये. पशोरन्नस्य भूमानं गवां स्फातिं नि यच्छतु.. (८) प्रकाश युक्त उदुंबर मणि शत्रुओं का हनन करने वाली, धनों का लाभ कराने वाली हो. वह मणि मुझे पशुओं तथा अन्न की अधिकता तथा गायों की अधिकता प्रदान करे. (८) यथाग्रे त्वं वनस्पते पुष्ट्या सह जज्ञिषे. एवा धनस्य मे स्फातिमा दधातु सरस्वती.. (९) हे वन का पालन करने वाली उदुंबर मणि! तुम जिस प्रकार ओषधियों और वनस्पतियों की रचना के समय पुष्टि के साथ उत्पन्न हुई हो, उसी प्रकार तुम्हारे साधन से सरस्वती देवी मुझे धन की अधिकता प्रदान करें. (९) आ मे धनं सरस्वती पयस्फातिं च धान्यम्. सिनीवाल्यु १ पा वहादयं चौदुम्बरो मणिः.. (१०) सरस्वती देवी मेरे धन की, दूध की तथा अन्न की वृद्धि करें. अमावस्या की देवी सिनीवाली तथा यह उदुंबर मणि धन आदि प्रदान करें. (१०) त्वं मणीनामधिपा वृषासि त्वयि पुष्टं पुष्टपतिर्जजान. त्वयी मे वाजा द्रविणानि सर्वौदुम्बरः स त्वमस्मत् सहस्वारादरातिममतिं क्षुधं च.. (११) हे उदुंबर मणि! तुम अन्य रक्षा साधनों की स्वामिनी हो. प्रजापति ने तुम को गाय, घोड़ा आदि की पुष्टि की क्षमता प्रदान की है. तुम में ये सभी घोड़े और अन्न व्याप्त हैं. तुम इन सब को पराजित करो. तुम शत्रु तथा दरिद्रता को हम से दूर करो. तुम बुद्धि के अभाव और भूख को हम से दूर करो. (११) ग्रामणीरसि ग्रामणीरुत्थायाभिषिक्तो ऽ भि मा सिञ्च वर्चसा. तेजो ऽ सि तेजो मयि धारयाधि रयिरसि रयिं मे धेहि.. (१२) हे उदुंबर मणि! तुम गाय की स्वामिनी हो. तुम हमारी सभी अभिलाषाओं को पूर्ण करो. तुम तेज से अभिषिक्त हो, उठ कर मुझे भी तेज से सिंचित करो. तुम तेज रूप हो, मुझ में भी तेज धारण करो. तुम धन प्राप्त करने वाली हो, मुझे भी धन प्राप्त कराओ. (१२) पुष्टिरसि पुष्ट्या मा समङ्ग्धि गृहमेधी गृहपतिं मा कृणु. औदुम्बरः स त्वमस्मासु धेहि रयिं च नः सर्ववीरं नि यच्छ रायस्पोषाय प्रति मुञ्चे अहं त्वाम्.. (१३) ebook converter DEMO Watermarks*