अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 890, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंविराजमान इंद्र का मैं आह्वान करता हूं. जलों की वर्षा करने वाले अग्नि तथा अश्विनीकुमारों का मैं आह्वान करता हूं. वे अश्विनीकुमार इंद्रियों की सामर्थ्य से तुम्हें बुद्धि, ओज और बल प्रदान करें. (४) सूक्त-४३ देवता—मंत्रों में कहे गए अग्नि आदि यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह. अग्निर्मा तत्र नयत्वग्निर्मेधा दधातु मे. अग्नये स्वाहा.. (१) जिस स्थान में सगुण ब्रह्म के स्वरूप को जानने वाले दीक्षा और तप के द्वारा जाते हैं, अग्नि देव मुझे वहां ले जाएं. अग्नि देव मुझे बुद्धि प्रदान करें. यह आहुति अग्नि को भलीभांति प्राप्त हो. (१) यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह. वायुर्मा तत्र नयतु वायुः प्राणान् दधातु मे. वायवे स्वाहा.. (२) सगुण ब्रह्म के स्वरूप को जानने वाले दीक्षा और तप के कारण जहां जाते हैं, वायु मुझे वहां ले जाएं तथा वायु मुझ में प्राणों का आधान करें. यह आहुति भलीभांति वायु को प्राप्त हो. (२) यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह. सूर्यो मा तत्र नयतु चक्षुः दधातु मे. सूर्याय स्वाहा.. (३) सगुण ब्रह्म के स्वरूप को जानने वाले दीक्षा और तप की सहायता से जहां जाते हैं, सूर्य देव मुझे वहां ले जाएं. सूर्य देव मुझे नेत्र प्रदान करें. यह आहुति सूर्य देव को भलीभांति प्राप्त हो. (३) यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह. चन्द्रो मा तत्र नयतु मनश्चन्द्रो दधातु मे. चन्द्राय स्वाहा.. (४) सगुण ब्रह्म का स्वरूप जानने वाले दीक्षा और तप की सहायता से जहां जाते हैं, चंद्र मुझे वहां पहुंचाएं. चंद्र देव मुझ में मन धारण करें. यह आहुति चंद्र देव को भलीभांति प्राप्त हो. (४) यत्र ब्रह्मविदो यान्ति दीक्षया तपसा सह. सोमो मा तत्र नयतु पयः सोमो दधातु मे. सोमाय स्वाहा.. (५) सगुण ब्रह्म के स्वरूप को जानने वाले दीक्षा और तप की सहायता से जहां जाते हैं, सोम मुझे वहां ले जाएं. सोम मुझे दूध प्रदान करें. यह आहुति सोम को भलीभांति प्राप्त हो. ebook converter DEMO Watermarks*