भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 92, कुल 1063 में से

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अथवा हम जिन से द्वेष रखते हैं. (३) वायो यत् ते शोचिस्तेन तं प्रति शोच यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (४) हे वायु देव! तुम्हारी जो दूसरों को शोक मग्न करने की शक्ति है, उस का प्रयोग उन लोगों के प्रति करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४) वायो यत् ते तेजस्तेन तमतेजसं कृणु यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (५) हे वायु देव! तुम्हारा जो तेज है, उस के द्वारा उन्हें तेजहीन बनाओ, जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (५) सूक्त-२१ देवता—सूर्य सूर्य यत् ते तपस्तेन तं प्रति तप यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (१) हे सूर्य देव! आप की जो तप्त करने की शक्ति है, उस से उन्हें संताप पहुंचाओ, जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (१) सूर्य यत् ते हरस्तेन तं प्रति हर यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (२) हे सूर्य देव! आप की जो सुख, शांति एवं शक्ति हरण करने वाली शक्ति है, उस से उन लोगों की सुख, शांति एवं शक्ति का हरण करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (२) सूर्य यत् ते ऽ र्चिस्तेन तं प्रत्यर्च यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (३) हे सूर्य देव! तुम्हारी जो दीप्ति है, उस से उन्हें जलाओ जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (३) सूर्य यत् ते शोचिस्तेन तं प्रति शोच यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (४) हे सूर्य देव! तुम्हारी जो शोक मग्न करने की शक्ति है, उस से उन्हें शोक मग्न करो जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (४) सूर्य यत् ते तेजस्तेन तमतेजसं कृणु यो ३ स्मान् द्वेष्टि यं वयं द्विष्मः.. (५) हे सूर्य देव! आप का जो तेज है, उस से उन्हें तेजहीन बनाओ जो हम से द्वेष करते हैं अथवा हम जिन से द्वेष करते हैं. (५) ebook converter DEMO Watermarks*

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