भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 920, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 920

सूक्त—६ देवत—इंद्र इन्द्र त्वा वृषभं वयं सुते सोमे हवामहे. स पाहि मध्वो अन्धसः.. (१) हे कामनाओं की वर्षा करने वाले इंद्र! हम यजमान निचोड़े हुए सोम को पीने के लिए तुम्हें बुलाते हैं. तुम मधुर सोम का पान करो. (१) इन्द्र क्रतुविदं सुतं सोमं हर्य पुरुष्टुत. पिबा वृषस्व तातृपिम्.. (२) हे अनेक यजमानों द्वारा स्तुति किए गए इंद्र! यज्ञ को पूर्ण करने वाला यह सोम निचोड़ा गया है. तुम तृप्त करने वाले इस सोमरस का दान करो. तुम इस सोम को पेट भर कर पियो. (२) इन्द्र प्र णो धितावानं यज्ञं विश्वेभिर्देवैभिः. तिर स्तवान विश्पते.. (३) हे स्तुति किए गए एवं मरुतों के स्वामी इंद्र! तुम सब देवों के साथ हमारे इस सोममय यज्ञ में आ कर हवि ग्रहण करो तथा हमारे यज्ञ की वृद्धि करो. (३) इन्द्र सोमाः सुता इमे तव प्र यन्ति सत्पते. क्षयं चन्द्रास इन्दवः.. (४) हे यजमानों का पालन करने वाले इंद्र! निचोड़ा गया और चंद्रमा की किरणों के समान सुख देने वाला यह सोम तुम्हारे पेट में जाता है. (४) दधिष्वा जठरे सुतं सोममिन्द्र वरेण्यम्. तव द्युक्षास इन्दवः.. (५) हे इंद्र! वरण करने योग्य एवं निचोड़े गए इस सोम को अपने पेट में धारण करो. दीप्ति वाले सोम तुम्हारे विशेष भाग हैं. (५) गिर्वणः पाहि नः सुतं मधोर्धाराभिरज्यसे. इन्द्र त्वादातमित् यशः.. (६) हे स्तुतियों द्वारा पूजन करने योग्य इंद्र! तुम हमारे द्वारा निचोड़े गए सोम को पियो. तुम मधुर सोम की धाराओं के द्वारा भिगोए जाते हो. हे इंद्र! यह सोम तुम्हारे यश का रूप है. (६) अभि द्युम्नानि वनिन इन्द्रं सचन्ते अक्षिता. पीत्वी सोमस्य वावृधे.. (७) यजमान का उज्ज्वल सोम इंद्र को भी सभी ओर से प्राप्त हो रहा है. इस सोम का पान करते हुए इंद्र वृद्धि प्राप्त करें. (७) अर्वावतो न आ गहि परावतश्च वृत्रहन्. इमा जुषस्व नो गिरः.. (८) हे वृत्र असुर के हंता इंद्र! तुम समीपवर्ती देश से तथा दूरवर्ती देश से हम यजमानों के ebook converter DEMO Watermarks*