अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 933, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंइंद्र देव हमारी दरिद्रता, बुद्धिहीनता तथा भूख का नाश करें. इंद्र देव ही देने योग्य धन के स्वामी हैं. वर्षा करने वाले इंद्र की ही गंगा आदि सात नदियां निचले स्थानों में अन्न को बढ़ाती है. (३) वयो न वृक्षं सुपलाशमासदन्त्सोमास इन्द्रं मन्दिनश्चमूषदः. प्रैषामनीकं शवसा दविद्युतद् विदत् स्व १ र्मनवे ज्योतिरार्यम्.. (४) जिस प्रकार पक्षी वृक्ष पर बैठते हैं, उसी प्रकार प्रसन्नता देने वाले सोम इंद्र का आश्रय लेते हैं. इन सोमों का मुख तेज से दीप्त होता है. इन्हीं सोमों ने मनुष्यों को प्रकाश प्राप्त करने के लिए सूर्य के रूप में ज्योति प्रदान की है. (४) कृतं न श्वघ्नी वि चिनोति देवने संवर्गं यन्मघवा सूर्य जयत्. न तत् ते अन्यो अनु वीर्यं शकन्न पुराणो मघवन् नोत नूतनः.. (५) जुआरी जिस प्रकार पासों को पकड़ता है, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां इंद्र को ग्रहण करती है. धन के स्वामी इंद्र ने अंधकार का विनाश करने वाले सूर्य देव को आकाश में स्थापित किया है. हे इंद्र! तुम्हारे इस कार्य का अनुकरण प्राचीन अथवा आधुनिक कोई अन्य नहीं कर सकता है. (५) विशंविशं मघवा पर्यशायत जनानां धेना अवचाकशद् वृषा. यस्याह शक्रः सवनेषु रण्यति स तीव्रैः सोमैः सहते पृतन्यतः.. (६) कामनाओं को पूर्ण करने वाले इंद्र अपने सभी उपासकों के पास एक साथ पहुंच जाते हैं तथा सब की स्तुतियां एक ही समय में सुन लेते हैं. इस प्रकार के इंद्र जिस यजमान के तीनों सपनों में प्रतिष्ठित होते हैं, वह अत्यधिक मादकता प्रदान करने वाले सोमों के प्रभाव से युद्ध के इच्छुक शत्रुओं को पराजित करता है. (६) आपो न सिन्धुमभि यत् समक्षरन्त्सोमास इन्द्रं कुल्या इव हृदम्. वर्धन्ति विप्रा महो अस्य सादने यवं न वृष्टिर्दिव्येन दानुना.. (७) जिस प्रकार जल सागर में जाता है और छोटी नदियां सरोवरों को प्राप्त करती हैं, उसी प्रकार सोमरस इंद्र देव की ओर जाते हैं. स्तोता अपनी स्तुतियों से इंद्र देव की महिमा को उसी प्रकार बढ़ाते हैं, जिस प्रकार जल देते हुए मेघ अन्न को बढ़ाते हैं. (७) वृषा न क्रुद्धः पतयद् रजःस्वा यो अर्यपत्नीरकणोदिमा अपः. स सुन्वते मघवा जीरदानवे ऽ विन्दज्ज्योतिर्मनवे हविष्मते.. (८) जो इंद्र सूर्य के द्वारा रक्षित जलों को पृथ्वी पर गिराते हैं, वे क्रोधित बैल के समान मेघ को छिन्नभिन्न कर देते हैं. इस के पश्चात धन के स्वामी इंद्र सोमरस निचोड़ने वाले एवं शीघ्र हवि प्रदान करने वाले यजमान को प्रकाश युक्त तेज प्रदान करते हैं. (८) ebook converter DEMO Watermarks*