भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 940, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 940

हे स्तोता! तुम इंद्र की पूजा उस प्रकार करो, जिस से वे हमें अपना मान लें. इंद्र सत्य के पुत्र और सत्य की रक्षा करने वाले हैं. (४) आ हरयः ससृजिरेऽरुषीरधि बर्हिषि. यत्राभि संनवामहे.. (५) इंद्र के सुंदर अश्व उन के रथ को हमारे यज्ञ में बिछे हुए कुशों के समीप लाएं. (५) इन्द्राय गाव आशिरं दुदुह्रे वज्रिणे मधु. यत् सीमुपह्वरे विदत्.. (६) वज्रधारी इंद्र के लिए गाएं उस समय मधुर दूध दुहाती हैं जिस समय पास में रखे हुए मधुर एवं स्वादिष्ट सोमरस को इंद्र पीते हैं. (६) सूक्त—२३ देवता—इंद्र आ तू न इन्द्र मद्र्य घ्गुवानः सोमपीतये. हरिभ्यां याह्यद्रिवः.. (१) हे वज्रधारी इंद्र! हमारे द्वारा आह्वान करने पर तुम सोमरस का पान करने के लिए अपने अश्वों द्वारा हमारे यज्ञ में आओ. (१) संत्तो होता न ऋत्वियस्तिस्तिरे बर्हिरानुषक्. अयुञ्जन् प्रातरद्रयः.. (२) हे इंद्र! हमारे यज्ञ में होता नाम का ऋत्विज् समय पर उपस्थित हो कर बैठे. हमारे यज्ञ में कुश एकदूसरे से मिले हुए बिछें. सोमरस कूटने के लिए प्रातः स्वप्न में पत्थर एकदूसरे से मिलें. (२) इमा ब्रह्म ब्रह्मवाहः क्रियन्त आ बर्हिः सीद. वीहि शूर पुरोळाशम्.. (३) हे इंद्र! हम तुम्हारी स्तुति कर रहे हैं. तुम इन कुशाओं पर बैठो. हे वीर! कुशाओं पर बैठ कर तुम हमारे द्वारा दिए गए पुरोडाश का भक्षण करो. (३) रारन्धि सवनेषु ण एषु स्तोमेषु वृत्रहन्. उक्थेष्विन्द्र गिर्वणः.. (४) हे स्तुतियों द्वारा सेवा करने योग्य तथा वृत्रासुर का वध करने वाले इंद्र! हमारे तीनों सवनो में की जाती हुई स्तुतियों से प्रसन्न बनो. (४) मतयः सोमपामुरुं रिहन्ति शवसस्पतिम्. इन्द्रं वत्सं न मातरः.. (५) हमारी स्तुतियां महान सोमरस का पान करने वाले तथा बल के स्वामी इंद्र को उसी प्रकार प्राप्त होती हैं, जिस प्रकार गाय अपने बछड़े को चाटती है. (५) स मन्दस्वा ह्यन्धसो राधसे तन्वा महे. न स्तोतारं निदे करः.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*