भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 942, कुल 1063 में से

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इन्द्र सोमाः सुता इमे तान् दधिष्व शतक्रतो. जठरे वाजिनीवसो.. (५) हे इंद्र! ये सोम, चमस आदि तुम्हारे हेतु एकत्र किए गए हैं. तुम इस सोम को उदरस्थ करो. (५) विद्मा हि त्वा धनंजयं वाजेषु दधृषं कवे. अधा ते सुम्नमीमहे.. (६) हे इंद्र! हम जानते हैं कि तुम युद्ध के अवसर पर शत्रुओं को अपने वश में करते हो तथा धनों के विजेता हो. (६) इममिन्द्र गवाशिरं यवाशिरं च नः पिब. आगत्या वृषभिः सुतम्.. (७) हे इंद्र! यहां आ कर पत्थरों से कूट कर तैयार किए गए और गाय का दूध मिले हुए सोम का पान करो. (७) तुभ्येदिन्द्र स्व ओक्ये ३ सोमं चोदामि पीतये. एषा रारन्तु ते हृदि.. (८) हे इंद्र! मैं इस सोम को पी कर अपने उदर में भर लेने के लिए तुम्हें प्रेरित करता हूं. यह सोम पीने के बाद तुम्हारे हृदय में रमा रहेगा. (८) त्वां सुतस्य पीतये प्रत्नमिन्द्र हवामहे. कुशिकासो अवस्यवः.. (९) हे इंद्र! हम कौशिक गोत्री ऋषि तुम से रक्षा की कामना करते हुए तैयार किए हुए सोम रस पीने के लिए तुम्हें बुलाते हैं. (९) सूक्त—२५ देवता—इंद्र अश्वावति प्रथमो गोषु गच्छति सुप्रावीरिन्द्र मर्त्यस्तवोतिभिः. तमित् पृणक्षि वसुना भवीयसा सिन्धमापो यथाभितो विचेतसः... (१) हे इंद्र! जो पुरुष तुम्हारे द्वारा रक्षित होता है, वह बहुसंख्यक अश्वों वाले युद्धों में तथा अश्वारोहियों में प्रमुख बन जाता है. वह गायों वाले पुरुषों में भी श्रेष्ठ होता है. जिस प्रकार जल सब ओर से सागर को भरते हैं, उसी प्रकार तुम भी उसे अनेक प्रकार से प्राप्त होने वाले धन से पूर्ण करते हो. (१) आपो न देवीरुप यन्ति होत्रियमवः पश्यन्ति विततं यथा रजः. प्राचैर्देवासः प्र णयन्ति देवयुं ब्रह्मप्रियं जोषयन्ते वरा इव.. (२) हे इंद्र! जिस प्रकार जल नीचे की ओर बहता हुआ सागर में जाता है, उसी प्रकार स्तुतियां तुम से जा कर मिल जाती हैं. जिस प्रकार मनुष्य सूर्य के प्रकाश की चकाचौंध के ebook converter DEMO Watermarks*