अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 965, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंरथ में जोड़ा जाता है. वज्र धारण करने वाले इंद्र सोने के समान कांति वाले हैं. (५) इन्द्रो दीर्घाय चक्षस आ सूर्यं रोहयद् दिवि. वि गोभिरद्रिमैरयत्.. (६) इंद्र ने सूर्य को आकाश में इसलिए स्थापित किया कि सब लोग उन का दर्शन कर सकें. वे ही इंद्र सूर्य के रूप में मेघों का भेदन करते हैं. (६) आ याहि सुषुमा हि त इन्द्र सोमं पिबा इमम्. इदं बर्हिः सदो मम.. (७) हे इंद्र! हम ने सोम तैयार कर लिया है. तुम इन बिछी हुई कुशाओं पर बैठ कर सोमरस पियो. (७) आ त्वा ब्रह्मयुजा हरी वहतामिन्द्र केशिना. उप ब्रह्माणि नः शृणु.. (८) हे इंद्र! ऋत्विजों के मंत्रोच्चारण के साथ ही तुम्हारे घोड़े रथ में जोड़े जाते हैं. वे घोड़े तुम्हें उस स्थान पर ले जाने में समर्थ हैं, जहां तुम जाना चाहते हो. तुम्हारे घोड़े तुम्हें हमारे यज्ञ में लाएं और तुम हमारे स्तोत्रों को सुनो. (८) ब्रह्माणस्त्वा वयं युजा सोमपामिन्द्र सोमिनः. सुतावन्तो हवामहे.. (९) हे इंद्र! हम तुम्हारे उपासक हैं. हम ने सोमपान किया है. तैयार किया हुआ सोमरस हमारे पास रखा है. इसी कारण हम तुम्हें सोमरस पीने को बुलाते हैं. (९) युञ्जन्ति ब्रध्नमरुषं चरन्तं परि तस्थुषः. रोचन्ते रोचना दिवि.. (१०) हे इंद्र! तुम्हारा रथ सभी प्राणियों को लांघता हुआ चलता है. तुम्हारे रथ में जुड़े हुए हरे रंग अथवा हरि नाम वाले घोड़े आकाश में चमकते हैं. (१०) युञ्जन्त्यस्य काम्या हरी विपक्षसा रथे. शोणा धृष्णू नृवाहसा.. (११) इंद्र के सारथी रथ में घोड़ों को जोड़ते हैं. ये घोड़े रथ के दोनों ओर रहते हैं. ये घोड़े कामना करने योग्य हैं एवं इंद्र की यात्रा पूर्ण करने में समर्थ हैं. (११) केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्या अपेशसे. समुषद्भिरजायथाः.. (१२) हे मनुष्यो! ये सूर्यरूपी इंद्र अज्ञानियों को ज्ञान देते हैं तथा अंधकार से ढके पदार्थों को प्रकाशित करते हैं. ये अपनी किरणों के साथ उदय हुए हैं. हे मनुष्यो! इन सूर्यरूपी इंद्र के दर्शन करो. (१२) उदु त्यं जातवेदसं देवं वहन्ति केतवः. दृशे विश्वाय सूर्यम्.. (१३)