भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 976, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 976

हे सूर्य रूपी इंद्र! हे आदित्य! तुम्हारे महान होने की बात सत्य है. तुम सत्य रूप वाले हो. तुम्हारी महिमा की प्रशंसा की जाती है, इसलिए तुम्हारे महिमावान होने की बात यथार्थ है. (३) बट् सूर्य श्रवसा महां असि सत्रा देव महां असि. महा देवानामसूर्यः पुरोहितो विभु ज्योतिरदाभ्यम्.. (४) हे सूर्य! तुम स्वयं महान हो. हमारे हवि रूप अन्न से तुम्हारी महिमा की वृद्धि हो. तुम अपनी महिमा के कारण ही राक्षसों से संघर्ष करते हो. तुम व्यापक हो. कोई तुम्हारी हिंसा नहीं कर सकता. (४) सूक्त-५९ देवता—इंद्र उदु त्ये मधुमत्तमा गिर स्तोमास ईरते. सत्राजितो धनसा अक्षितोतयो वाजयन्तो रथा इव.. (१) ये स्तोत्र एवं गायन योग्य वाणियां उत्पन्न हो रही हैं. धन देने वाली वाणी शत्रुओं पर विजय पाती है. अन्न देने वाली स्तोता की सदा रक्षा करती है. जिस प्रकार रथ अपने स्वामी को गंतव्य पर पहुंचाने के लिए चलता है, उसी प्रकार हमारी ये वाणियां इंद्र को प्रसन्न करने के लिए उन के पास जाएं. (१) कण्वा इव भृगवः सूर्या इव विश्वमिद्धीतमानशुः. इन्द्रं स्तोमेभिर्महयन्त आयवः प्रियमैधासो अस्वरन्.. (२) कण्व गोत्र के ऋषियों की स्तुति जिस प्रकार तीनों लोक के स्वामी इंद्र को प्राप्त होती है, जिस प्रकार द्यावा, अर्यमा आदि सूर्य अपने प्रेरणाप्रद इंद्र से मिलते हैं, उसी प्रकार भृगु वंश के ऋषि इंद्र का आश्रय लेते हैं और प्रिय बुद्धि वाले मनुष्य इंद्र की स्तुति करते हैं. (२) उदिन्वस्य रिच्यतें ऽ शो धनं न जिग्युषः. य इन्द्रो हरिवान्न दभन्ति तं रिपो दक्षं दधाति सोमिनि.. (३) इंद्र का यज्ञ भाग जीते हुए धन के समान होता है. हरि नाम के अथवा हरे रंग के घोड़ों वाले इंद्र की हिंसा नहीं कर सकते. जो यजमान इंद्र को सोमरस देता है, इंद्र उस में बल को स्थापित करते हैं. (३) मन्त्रमखर्वं सुधितं सुपेशसं दधात यज्ञियेष्वेषा. पूर्वीश्चन प्रसितयस्तरन्ति तं य इन्द्रे कर्मणा भुवत्.. (४) हे स्तोताओ! ऐसे यज्ञ संबंधी मंत्रों का उच्चारण करो जो सुंदर, तेज और रूप प्रदान करने में समर्थ हों. इंद्र की सेवा करने वाला मनुष्य सभी बंधनों से छुटकारा पा जाता है. (४) ebook converter DEMO Watermarks*