अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 986, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंआ त्वेता नि षीदतेन्द्रमभि प्र गायत. सखाय स्तोमवाहस:.. (११) हे मेरे मित्र स्तोताओ! तुम यहां यज्ञशाला में विराजो और इंद्र का गुणगान करो. (११) पुरूतमं पुरूणामीशानं वार्याणाम्. इन्द्र सोमे सचा सुते.. (१२) हे स्तोताओ! वरण करने वालों के स्वामी इंद्र अत्यधिक महान हैं. सोमरस निचोड़ दिए जाने पर उन्हें यहां बुलाओ. (१२) सूक्त-६९ देवता—इंद्र स घा नो योग आ भुवत् स राये स पुरंध्याम्. गमद् वाजेभिरा स न:.. (१) जब हमें कोई चिंता होती है अथवा हम इंद्र का चिंतन करते हैं, उस समय इंद्र हमारे सामने प्रकट होते हैं. इंद्र अन्नों को साथ में ले कर हमारे पास आएं. (१) यस्य संस्थे न वृण्वते हरी समत्सु शत्रव:. तस्मा इन्द्राय गायत.. (२) हे स्तोताओ! जब इंद्र युद्ध में लगे होते हैं, तब शत्रु उन के घोड़ों को नहीं घेर पाते ऐसे समय इंद्र की स्तुति करो. (२) सुतपाव्ने सुता इमे शुचयो यन्ति वीतये. सोमासो दध्याशिर:.. (३) दही से मिला हुआ सोमरस पवित्र है. यह सोमरस सोम पीने वाले इंद्र के लिए तैयार हो रहा है. (३) त्वं सुतस्य पीतये सद्यो वृद्धो अजायथा:. इन्द्र ज्यैष्ठ्याय सुक्रतो.. (४) हे इंद्र! तुम सोमरस का पान करने के लिए शीघ्र ही अपने शरीर का विस्तार कर लेते हो. (४) आ त्वा विशन्त्वाशव: सोमास इन्द्र गिर्वण: शं ते सन्तु प्रचेतसे.. (५) हे इंद्र! तुम्हें स्फूर्ति देने वाला सोमरस तुम्हारे शरीर में प्रवेश करे तथा तुम्हें तृप्त बनाए. (५) त्वां स्तोमा अवीवृधन् त्वामुक्था शतक्रतो. त्वां वर्धन्तु नो गिर:.. (६) हे इंद्र! स्तोम, उक्थ और हमारी वाणी रूपी स्तुतियां तुम्हारी वृद्धि करें. (६) अक्षितोति: सनेदिमं वाजमिन्द्र: सहस्रिणम्. यस्मिन् विश्वानि पौंस्या.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*