भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 991, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 991

हे अध्वर्युजनो! तुम उक्थ मंत्र बोलते हुए सोमरस को चमसों के द्वारा मिलाओ. यह सोम निचुड़ जाने पर इंद्र को प्रसन्न करता है. (८) मत्स्वा सुशिप्र मन्दिभि स्तोमेभिर्विश्वचर्षणे. सचैषु सवनेष्वा.. (९) हे सुंदर ठुड्डी वाले इंद्र! तुम सोमयागों में हर्षवर्धक सोमरस को पी कर हर्ष प्राप्त करो. (९) असृग्रमिन्द्र ते गिरः प्रति त्वामुदहासत. अजोषा वृषभं पतिम्.. (१०) जिस प्रकार कामना करने वाली स्त्रियां उस पति के पास जाती हैं जो उन में गर्भाधान कर सकता है, उसी प्रकार हमारी स्तुतियां तुम्हें प्राप्त होती हैं. (१०) सं चोदय चित्रमर्वाग् राध इन्द्र वरेण्यम्. असदित् ते विभु प्रभु.. (११) हे इंद्र! हमारी ओर उस धन को आने की प्रेरणा दो जो वरण करने योग्य, सुंदर और सत्य को धारण करने वाला हो. (११) अस्मान्त्सु तत्र चोदयेन्द्र राये रभस्वतः तुविद्युम्न यशस्वतः.. (१२) हे इंद्र! तुम हमें महान, यशस्वी और ऐश्वर्य वाला होने की प्रेरणा दो. (१२) सं गोमदिन्द्र वाजवदस्मे पृथु श्रवो बृहत्. विश्वायुर्धेह्यक्षितम्.. (१३) हे इंद्र! हमें वह यज्ञ प्रदान करो जो गायों से युक्त, हवियों से संपन्न तथा पूर्ण आयु को देने वाला हो. (१३) अस्मे धेहि श्रवो बृहद् द्युम्नं सहस्रसातमम्. इन्द्र ता रथिनीरिषः.. (१४) हे इंद्र! सहस्रों मनुष्यों द्वारा सेवन करने वाले धन तथा रथ वाली सेनाओं को हमें प्रदान करो. (१४) वसोरिन्द्रं वसुपतिं गीर्भिर्गृणन्त ऋग्मियम्. होम गन्तारमूतये.. (१५) हम धन के स्वामी, वसुओं के ईश्वर, ऋग्वेद के द्वारा प्रशंसित इंद्र की साधनों से पूजा करते हैं. (१५) सुतेसुते न्योकसे बृहद् बृहत एदरिः. इन्द्राय शूषमर्चति.. (१६) महान इंद्र के लिए सोमयाग में हर बार सोमरस निचोड़े जाने पर शत्रु भी इंद्र के बल की प्रशंसा करते हैं. (१६) ebook converter DEMO Watermarks*