बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished774 पृष्ठ
पृष्ठ 132, कुल 774 में से
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: by sandhi सुमेधा उशन्, which some MSS write as सुमेधा ऽशन्! Wait, could it be ऽशान्orऽशन्? It looks like ऽशन्`.
* Let's check Line 13:
`त्वा वसूनि पुरुधा विशन्तु । दीर्घमायुर्यजमानाय कृण्वन्त्सत्या-`
Notice `कृण्वन्त्सत्या-` (कृण्वन् + सत्या with parasitic त: `न्त्स`).
* Line 14:
`मृतेन जरितारमङ्ग्धीत्यथैनं विश्वकर्मन्नितिषहं स्रुवाघाराञ्जुहोति-`
Wait! Let's read line 14 carefully:
`मृतेन जरितारमङ्ग्धीत्यथैनं विश्वकर्मन्नितिषहं स्रुवाघाराञ्जुहोति-`?
Wait! TS 1.3.1:
"घृतेन जरितारमङ्ग्धि" ? No, look at line 13 end:
Line 13 ends with: `सत्या-`
Then line 14 begins with:
`मृतेन`? No!
`सत्यामाशिषम्`?
Look at line 14:
`माशिषमाशास्त इति`?
Wait!