बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)

बौधायन श्रौतसूत्रम् (कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा - सम्पूर्ण प्रश्न एवं श्रौत-याग कल्प सटीक)
Baudhayana Shrautasutra of Taittiriya Samhita with Commentary
आचार्य बौधायन (सम्पादक: डब्ल्यू. कालन्द) द्वारा
DevanagariHindipublished774 पृष्ठ
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ूषु बिभ्रतः । प्रजावन्तो अशीमहि" or "अग्नीमहीति"?
TS 1.8.5.2: "वयꣳ सोम व्रते तव मनस्तनूषु बिभ्रतः । प्रजावन्तो अग्नीमहि ॥"
YES! अग्नीमहि!
Now look at the junction: अग्नीमहि + इति -> अग्नीमहौति? No, अग्नीमहीति!
Wait, look at the printed text: अग्नीमहीत्यथ!
Let's check the letters:
अ ग्नी म ही त्य ' थ?
Wait, after त्य, there is an apostrophe '!
अग्नीमहीत्यथ or अग्नीमहीत्य॑थ?
Wait, look at the mark above/after त्य:
It is ' (apostrophe)!
So: अग्नीमहीत्य'थ or अग्नीमहीति ' अथ?
Wait, त्य has an apostrophe right after it, then थ!
Wait, अग्नीमहीत्य'थ is Caland's way of writing अग्नीमहीति ' अथ combined in sandhi!
Wait, let's look at